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फर्जी हस्ताक्षर कर बनाई एटीआर और बंद कराई शिकायत

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पानीपत। जनस्वास्थ्य विभाग की 17 साल पुराने सीवरेज लाइन की सीएम विंडो पर की गई शिकायत में एक नया मोड़ आया है। इस मामले में शिकायकर्ता के फर्जी हस्ताक्षर दिखाकर शिकायत को ही बंद करवा दिया गया। इसमें लिखा दिखाया गया है कि वह इस मामले में विभाग की जांच से संतुष्ट हैं और इसकी शिकायत वापस लेते हैं।
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हैैैरान करने वाली बात यह है कि इस एटीआर (एक्शन टेकिंग रिपोर्ट) में शिकायतकर्ता का नाम ही बदल दिया गया है और इसका एक गवाह भी बनाया गया है। इसका खुलासा सीएम विंडों की एटीआर रिपोर्ट से हुआ है। जिसकी एक बार फिर से सीएम विंडो के उपभोक्ता केयर सेंटर पर शिकायत की गई है।
गौरतलब है कि ये वही सीवरेज लाइन है जिसका खुलासा आरटीआई के माध्यम से 17 साल बाद हुआ है। विभाग ने इसे ढूंढ तो लिया लेकिन अब तक इसकी जानकारी जुटाने में नाकामयाब रहा है। वहीं, जब इसे चालू करने के लिए पानी छोड़कर ट्रायल लिया गया तो ये लाइन कनेक्टिविटी न होने से फेल हो गई थी। इन सभी खबरों को ‘अमर उजाला’ ने अपने 11 और 23 नवंबर के अंक में प्रकाशित किया था।
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दूसरे का नाम लिखकर बनाया एक गवाह
एटीआर रिपोर्ट के साथ संलग्न पत्र में शिकायतकर्ता नरेश कुमार की जगह नरेंद्र कुमार नाम लिखा गया है। साथ ही एक अन्य व्यक्ति का नाम भी साथ लिखा गया है। पुष्टि के लिए मोबाइल नंबर तक लिख दिए गए हैं। इसी आधार पर सीएम विंडो की एटीआर तैयार की गई और शिकायत को ही बंद कर दिया गया।
ये था मामला-
वार्ड नंबर-3 सुधीर नगर निवासी नरेश वर्मा ने बताया कि उनके एरिया में 2004 में सीवर लाइन बिछाई गई थी, जो 2021 तक 17 साल बाद भी चालू नहीं हुई। इस संबंध में उन्होंने नगर निगम, जिला प्रशासन, इनके मुख्यालयों में भी आरटीआई लगाकर इस प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी मांगी, जो नहीं मिली।
इसके बाद दूसरी अपील में अपीलकर्ता और एक्सईएन सीवरेज विंग पब्लिक हेल्थ को तलब किया गया। हालांकि अभी तक न तो निगम और न ही पब्लिक हेल्थ विभाग इसकी कोई जानकारी दे पाया है। इसकी शिकायत सीएम विंडो पर की गई है, जिसे फर्जी हस्ताक्षर कर बंद करवा दिया गया है। वहीं, स्थनीय लोगों को 17 साल से अब तक इस सीवरेज लाइन की कोई सुविधा नहीं मिल सकी है। जिससे उनमे रोष है।
करवाएंगे जांच
शिकायत पर विभाग ने काम भी किया था। मौके पर टीम भी गई थी लेकिन गलत तरीके से शिकायत बंद करवाने और हस्ताक्षर करने के मामले की जांच की जाएगी। वहीं, अगर शिकायकर्ता चाहे तो शिकायत दोबारा खुलवा सकता है। -हरविंद्र शर्मा, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग, पानीपत।
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