पानीपत। सोमवार को अहोई अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। हर वर्ष यह त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु के लिए अहोई माता का व्रत रखती हैं। अहोई अष्टमी को माताएं तारों को देखकर अर्घ्य देती हैं और फिर व्रत का पारण करती हैं। यह व्रत संतान प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए किया जाता है। निसंतान माताएं भी इस दिन संतान प्राप्ति की कामना करते हुए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संतान प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी के दिन पूजा से संबंधित कुछ उपाय भी हैं। इन उपायों के करने से सभी मनोकामनाएं जल्द पूरी होती हैं। अवध धाम मंदिर से ज्योतिषाचार्य पं. राधे-राधे ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखते हैं। यह व्रत निर्जला होता है और इसमें तारों को देखने की परंपरा है। माताएं अपनी संतान की सुरक्षा, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए रखती हैं।
अहोई अष्टमी पर इस बार सर्वार्थ सिद्धि, शिव और सिद्ध योग बन रहे हैं। ये तीनों ही योग शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं।
मान्यता के अनुसार अहोई पूजन के लिए शाम के समय घर की उत्तर दिशा की दीवार पर गेरू या पीली मिट्टी से आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है। उसी के पास सेह और उसके बच्चों की आकृतियां बनाई जाती हैं और विधिपूर्वक स्नान, तिलक आदि के बाद खाने का भोग लगाया जाता है। समृद्ध परिवार इस दिन चांदी की अहोई बनवाकर भी पूजन करते हैं। इसी के साथ कुछ जगह चांदी की अहोई में दो मोती डालकर विशेष पूजा करने का भी विधान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, संतान प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी के दिन माता अहोई के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की भी पूजा करें। पूजन में इनको दूध-भात का भोग लगाएं। पूजन के खाने में से एक हिस्सा गाय व उसके बछड़े के लिए निकालें। फिर सायंकाल पीपल के पेड़ के नीचे पांच दीपक जलाएं और मन में मनोकामना बोलते हुए परिक्रमा करें। ऐसा करने से अहोई माता प्रसन्न होती हैं।
ऐसे बने तीन शुभ योग
17 अक्तूबर सुबह से शाम 4:02 बजे तक अहोई अष्टमी को शिव योग और शाम को 4:02 बजे से अगले दिन शाम 4:53 बजे तक सिद्ध योग और 18 अक्तूबर, सुबह 5:13 से 6:23 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि का प्रारंभ 17 अक्तूबर सोमवार सुबह 9:29 से 18 अक्तूबर मंगलवार को सुबह 11:57 बजे तक होगा। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:50 से 7:05 बजे तक होगा। अहोई अष्टमी तारों को देखने का समय शाम 6:13 बजे से प्रारंभ होगा और अहोई अष्टमी चंद्रोदय समय रात 11:24 बजे होगा।
अहोई अष्टमी के दिन पति-पत्नी साथ मिलकर अहोई माता को सफेद फूल चढ़ाएं और संतान प्राप्ति की प्रार्थना करें। साथ ही घर में जितने सदस्य हों, उतने पेड़ लगाएं और साथ में एक छोटा सा तुलसी का पौधा भी लगाएं। लगाए गए पौधों का हर रोज ध्यान रखें। मान्यता है कि ऐसा करने से जल्द आपकी मनोकामना पूरी होगी।