सभी प्रकार के विकास कार्यों के टेंडर और उनकी प्रक्रिया समेत विकास कार्यों की पूरी रिपोर्ट इलेक्ट्रोनिक व इंटरनेट के माध्यम से तैयार करने की योजना पर नगर निगम काम शुरू करने जा रहा है। इसके लिए शहरी स्थानीय निकाय ने ई-एमबी (इलेक्ट्रोनिक मेजरमेंट बुक) यानी ई माप पुस्तक पर काम करवाने के लिए सभी निगम अधिकारियों को हिदायत जारी की है। हालांकि टेंडर प्रक्रिया को पेपर लैस और पारदर्शी बनाने के लिए निगम ने एक साल पहले ही डब्ल्यूएमएस (कार्य प्रबंधन प्रणाली) को लागू कर दिया था। इसके बाद भी कई निगम अधिकारी माप पुस्तक पर मैन्युअल ही काम कर रहे थे। जिससे विकास कार्यों की पूरी प्रक्रिया व सभी प्रकार की फाइलें सॉफ्ट कॉपी और पेपर लैस भी नहीं थी।
इस वजह से कई बार विकास कार्यों की फाइल भी गुम हो जाती है और काम भी मुश्किल हो जाता है। जिसके बाद पुराने डाटा को ट्रेस करने में दिक्कत आती थी। मैन्युअल काम की वजह से निगम के विकास कार्यों में गड़बड़ी की आशंकाएं भी बनी रहती थी। अब इन फाइलों को कोई भी अधिकारी अपनी यूजर आईडी व पासवर्ड की मदद से कहीं से भी देख सकता है।
यह था डब्लयूएमएस पोर्टल
शहरी स्थानीय निकाय ने प्रदेश के सभी नगर निगमों को 4 अगस्त 2020 को निगम के अंतर्गत लगने वाले सभी टेंडर को पारदर्शी व पेपरलैस बनाने के लिए वर्क मैनेजमेंट सिस्टम यानी कार्य प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से करवाने का फैसला लिया था। इसके लिए सभी नगर निगम को निकाय की तरफ से एक यूजर आईडी व पासवर्ड भी दिया गया। कार्य प्रबंधन प्रणाली पोर्टल पर किसी भी टेंडर का फंड, हेड ऑफिस द्वारा ग्रांट जारी करना, नए और संशोधित अनुमान तैयार करना, स्वीकृतियां, अस्वीकृतियां, माप बुक, बिलिंग, लेखा एवं ऑडिट तक शामिल का ब्योरा डाला जाना तय किया गया।
यह है एमबी और ई-एमबी
टेंडर प्रक्रिया के बाद टेंडर की पूरी जानकारी, टेंडर के काम की विकास कार्यों की पूरी रिपोर्ट एक मेजरमेंट बुक में लिखी जाती है। इसे एमबी कहते हैं। अब इसे भी ई-एमबी बनाया जाएगा। यानी ये फाइलें भी इलेक्ट्रोनिक मोड में तैयार की जा सकेंगी। इस एमबी के आधार पर कोई भी एजेंसी या कंपनी निगम से अपने काम का भुगतान करवाती थी। इसकी एक कंप्यूटर में सॉफ्ट कॉपी बनाई जाएगी। इस कंप्यूटर फाइल पर सभी अधिकारी काम करेंगे।
यह विकास कार्य हैं शामिल
कार्य प्रबंधन प्रणाली वेब पोर्टल पर अब टेंडर संबंधित फंड का आवंटन, सभी संबंधित यूएलबी को हेड ऑफिस से ग्रांट जारी करना, तैयारी नए संशोधित प्राक्कलन, प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, एमबी, बिल तैयार करने, बिलों के भुगतान और ऑडिट की मंजूरी की जानकारी उपलब्ध रहेगी। इसमें टेंडर की प्रक्रिया, तुलनात्मक स्थिति और काम का आवंटन व्यवस्था में इन मॉड्यूल को विकसित किए जाने के बाद से अलग से किया जाएगा। जिन विकास कार्यों के फंड को यूएलबी अपने स्तर पर मैनेज कर रहा है, इनमें नगर निगम फंड, एमपी लैड, डिपॉजिट वर्क्स, डी-प्लान आदि भी कार्य प्रबंधन प्रणाली के जरिए ही प्रोसेस किए जाएंगे।
सरकार ने ऑनलाइन प्रणाली के तहत ई-एमबी को लागू किया है, जिसमें अब इलेक्ट्रॉनिक मोड में एमबी भरी जाएगी और बनाई जाएगी। इसके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों को ट्रेनिंग भी दी गई है। जल्द ही सरकार के आदेशानुसार ई एमबी को निगम के कार्यों में लागू किया जाएगा।
प्रदीप कल्याण, एक्सईएन, नगर निगम पानीपत।