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24 साल बाद अमृत योग में मनाया जाएगा रक्षाबंधन का त्यौहार

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24 साल बाद अमृत योग में मनाया जाएगा रक्षाबंधन
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- 11 अगस्त को मनाया जाएगा पर्व, भद्रा योग का रहेगा साया
- रक्षाबंधन पर्व को लेकर भाई बहनों में विशेष उत्साह
- पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही शुरू हो जाएगी भद्रा, पाताल लोक में होगा भद्रा का वास
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। रक्षाबंधन का त्योहार सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 11 अगस्त को सुबह 10:38 बजे होगी, जबकि पूर्णिमा तिथि का समापन 12 अगस्त को सुबह 7:05 बजे होगी। इस बार रक्षाबंधन के दिन एक बेहद शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है, जिसके कारण रक्षाबंधन का त्योहार और भी खास माना जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन का त्योहार अमृत योग में भी मनाया जाएगा।
रक्षाबंधन पर्व को लेकर इस बार लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग रक्षाबंधन 11 को तो कुछ 12 अगस्त को होने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में श्री अवध धाम मंदिर से ज्योतिषाचार्य पं. राधे-राधे ने लोगों में बनी असमंजस की स्थिति को दूर करते हुए कहा कि रक्षाबंधन का पर्व इस बार 11 अगस्त को तीन शुभ योग आयुष्मान, रवि और शोभन योग में मनाया जाएगा। साथ ही, रक्षाबंधन पर अमृत योग भी बन रहा है। ऐसा दुर्लभ संयोग 24 साल बाद बना है। अमृत योग में किए गए शुभ कार्य सफलतापूर्वक संपन्न होते हैं।
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पं. राधे-राधे ने कहा कि रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को सुबह 10:38 बजे शुरू होकर 12 अगस्त को सुबह 07:05 बजे तक रहेगी। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के आधार पर रक्षाबंधन का पर्व 11 अगस्त को ही मनाया जाएगा। 12 अगस्त को उदया तिथि पूर्णिमा त्रि मुहूर्त व्यापनी नहीं है, इसलिए शास्त्रानुसार उस दिन यह त्योहार नहीं मनाया जाएगा।
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पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही शुरू हो जाएगी भद्रा
पंडित राधे-राधे ने बताया कि पंचांग गणना के अनुसार 11 अगस्त को पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही भद्रा शुरू हो जाएगी। 11 अगस्त को भद्रा के दौरान चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे, जिसके कारण भद्रा का वास पाताल लोक में माना जाएगा। उन्होंने कहा कि पाताल लोक में भद्रा को अशुभ नहीं माना जाता। ऐसे में 11 अगस्त को ही रक्षाबंधन मनाना शुभ रहेगा।
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भद्रा को ऐसे समझें
पंडित शोनक ने कहा कि जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन राशि में होता है, तब भद्रा का वास स्वर्गलोक में रहता है। कन्या, तुला, धनु या मकर राशि में चंद्रमा के स्थित होने पर भद्रा पाताल लोक में होती है। भद्रा जिस लोक में रहती है, वहीं प्रभावी रहती है। इस प्रकार जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन राशि में होगा तभी वह पृथ्वी पर असर करेगी अन्यथा नहीं। जब भद्रा स्वर्ग या पाताल लोक में होगी, तब वह शुभ फलदायी कहलाएगी।
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रक्षाबंधन पर बन रहे ये शुभ योग
आयुष्मान योग : 10 अगस्त को शाम 7:35 बजे से 11 अगस्त को दोपहर 3:31 बजे तक
रवि योग : 11 अगस्त को सुबह 5:30 बजे से 6:53 बजे तक।
शोभन योग : 11 अगस्त को दोपहर 3:32 बजे से 12 अगस्त को सुबह 11:33 बजे तक
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रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 11 अगस्त को सुबह 10:38 बजे।
पूर्णिमा तिथि समाप्त : 12 अगस्त को सुबह 07:05 बजे।
शुभ मुहूर्त : 11 अगस्त को सुबह 10:38 बजे से रात 9:14 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:06 से 12:57 बजे तक।
अमृत काल : शाम 6:55 बजे से रात 8:20 बजे तक।
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:29 बजे से 5:17 बजे।
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