पानीपत। अब गर्भवती महिलाओं की प्रजनन व बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) आईडी और मां व शिशु ट्रैकिंग प्रणाली (एमसीटीएस) नंबर के बिना अल्ट्रासाउंड किया गया तो अल्ट्रासाउंड केंद्र पर कार्रवाई की जाएगी।
गर्भवतियों को गर्भधारण के तीन माह के भीतर आरसीएच आईडी और मां व एमसीटीएस में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण कराना होगा ताकि स्वास्थ्य विभाग उन्हें ट्रैक कर उन्हें स्वास्थ्य लाभ दे सके और उनकी संस्थानों में डिलीवरी करवा सके।
यह नियम सरकारी व निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लागू हो चुका है। इसके लिए महानिदेशक (स्वास्थ्य सेवाएं) की ओर से प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को पत्र जारी किया गया है। नियम का पालन न करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले यह नियम प्रदेश में सिर्फ करनाल में ही लागू था। इसकी सफलता के बाद अब इस नियम को स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। नियमानुसार गर्भवतियों का 16 से 20 सप्ताह के अंदर अल्ट्रासाउंड होना अनिवार्य है। इसके अलावा महिला रोग विशेषज्ञ गर्भवती की हालत के अनुसार अल्ट्रासाउंड करवा सकती है।
अल्ट्रासाउंड के लिए ये दस्तावेज जरूरी : स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गर्भवती को अल्ट्रासाउंड करवाना है तो उसके पास एक चिकित्सक का मान्य रेफरेंस कार्ड, पहचान पत्र, फोटो होना चाहिए। इसके बाद ही केंद्र गर्भवती का अल्ट्रासाउंड कर सकता है। अब इसमें आरसीएमएच को अनिवार्य कर दिया गया है।