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टेक्सटाइल इंडस्ट्री का 1500 करोड़ का कारोबार प्रभावित

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पानीपत। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से भारत बंद के आह्वान पर पानीपत के उद्योगों का करीब 1500 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित रहा। शहर के अधिकतर उद्यमियों ने फैक्टरियां बंद रखीं। सेक्टर-29 पार्ट टू और सेक्टर-25 में कुछ फैक्टरी चलीं, लेकिन वे एक ही शिफ्ट में चल सकीं, क्योंकि इनमें श्रमिक काफी कम पहुंचे थे। उद्यमियों ने बिना कोई प्रतिक्रिया दिए किसानों का समर्थन किया ।
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गोहाना रोड स्थित फैक्टरियों के श्रमिकों की रही छुट्टी
गोहाना रोड पर गांव डाहर तक आठ बड़ी फैक्टरी हैं। गांव डाहर के पास श्रमिकों ने सुबह ही जाम लगा दिया था। किसानों ने डाहर गोल चक्कर व शुगर मिल के पास सड़क पर पेड़ काटकर डाल दिए। ट्रालों को वहां खड़ा कर दिया गया। इसलिए श्रमिक फैक्टरियों में नहीं पहुंच पाए और उनकी छुट्टी हो गई।
यहां सबसे अधिक रहा भारत बंद का असर
सनौली, बापौली, नूरवाला, गोहाना रोड, काबड़ी, सिवाह, समालखा व इसराना क्षेत्र के उद्योग लगभग बंद ही रहें। शहर के बाहरी क्षेत्र में एक हजार से अधिक छोटी- बड़ी फैक्टरी हैं। इनमें स्थानीय श्रमिक ही काम कर करते हैं। शहर के बाहरी क्षेत्रों में भारत बंद का काफी असर था। मुख्य रोड को जाम रखा गया था इसलिए उद्योगपति, मैनेजर व श्रमिक इन फैक्टरियों में नहीं पहुंच पाए।
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500 हजार करोड़ का हुआ व्यापार
टेक्सटाइल नगरी की लगभग 18 हजार फैक्टरियों में हर रोज दो हजार करोड़ का उत्पादन होता है। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत फैक्टरी बंद थी। लगभग सभी फैक्टरियों पर श्रमिकों की अनुपिस्थति के कारण असर था। भारत बंद के कारण शहर की औद्योगिक ईकाइयों में 500 करोड़ का उत्पादन हुआ है।
नहीं चले व्यावसायिक वाहन
फैक्टरियों से माल लेकर जाने वाले व्यावसायिक वाहनों का पहिया पूरी तरह रुका रहा। फैक्टरियों से हर रोज वेस्ट, कपड़े, धागे, दरी, कंबल, बाथमैट व मशीनों के पार्ट से लोड़ कर हजारों कमर्शियल वाहन एक फैक्टरी से दूसरी फैक्टरी में जाते हैं। दिल्ली व मुरथल कंटेनर साइट पर वाहन जाते हैं, भारत बंद के कारण ये व्यापार पूरी तरह से बंद रहा।
उद्यमी बोले
सेक्टर 29 पार्ट टू, पार्ट वन व सेक्टर 25 के उद्यमियों ने बताया कि उनकी फैक्टरी में अधिकतर प्रवासी श्रमिक ही काम करते हैं, लेकिन जनरल मैनेजर, मैनेजर, मास्टर, सुपरवाइजर, कंप्यूटर ऑपरेटर, स्टोर कीपर व चालक के रूप में अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग काम करते हैं। जगह जगह रोड जाम थे इसलिए वो फैक्टरी में नहीं पहुंच पाए। फैक्टरियों का कागजी काम भी पूरा नहीं हुआ। उत्पादन ठप रहा, एक फैक्टरी से दूसरी फैक्टरी में माल नहीं जा पाया। पेडिंग काम ही अपने ऑफिस में बैठकर निपटाया है।
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