पानीपत। बिजली निगम में फर्जी वाउचर बनाकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और पेंशन के घोटाले में सीआईए-2 ने 1.44 करोड़ रुपये और एक स्कॉर्पियो कार बरामद की गई है। सीआईए-2 ने बरामदगी के बाद 22 मार्च को सहानपुर से गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी क्लर्क को बुधवार को कोर्ट में पेश कर फिर से पांच अप्रैल तक रिमांड पर लिया गया है। आरोपी एक्सईएन और अकाउंटेंट एवं दो अन्य को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
रिमांड के दौरान क्लर्क राघव वधावन ने कबूला किया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी पीपीओ एवं वाउचर तैयार कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और पेंशन के फंड में गोलमाल किया। उसने इसी रकम से स्कॉर्पियो भी खरीदी। एएसपी पूजा वशिष्ठ ने बताया कि रिमांड के दौरान चारों आरोपियों के कब्जे से पुलिस रिमांड के दौरान 57.16 हजार रुपये नकद, 70 लाख रुपये कीमत के 1.800 किलो सोने के आभूषण, 17 लाख रुपये कीमत की स्कॉर्पियो और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। कुल मिलाकर 1.44 करोड़ 16 हजार रुपये की रिकवरी हुई है।
सहारनपुर निवासी क्लर्क राघव वधावन से 46.86 लाख रुपये, स्कोर्पियो कार और गबन के पैसों से खरीदे गए 1.800 किलो सोने के जेवरात बरामद किए गए। इनकी कीमत 70 लाख रुपये है। यमुनानगर निवासी अकाउंटेंट योगेश लांबा से रिमांड के दौरान पांच लाख रुपये बरामद हुए। इसके साथ ही इस घोटाले में फर्जी बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराने वाले सहारनपुर निवासी जीजा पवन शर्मा से तीन लाख रुपये एवं दो मोबाइल और आरोपी साले समालखा निवासी अजय शर्मा से 2.30 रुपये बरामद किए गए हैं। क्लर्क राघव वधावन को सहानपुर से 28 मार्च को गिरफ्तार किया गया था, जबकि बिजली निगम के एक्सईएन नीरज शर्मा को 24 फरवरी, अकाउंटेंट योगेश लांबा को 22 फरवरी और साथ में जीजा-साले को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था।
एक अन्य आरोपी यमुनानगर से ट्रांसफर होकर समालखा आए डिप्टी सुपरिटेंडेंट चक्रवर्ती शर्मा ने अपने ऊपर लगाए गए गबन के आरोपों को झूठ बताते हुए समालखा डिविजन कार्यालय में जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस का कहना है कि फिर से लिए गए रिमांड में आरोपी क्लर्क राघव वधावन से रिश्तेदारों एवं जानकारों को दिए गए गबन के रुपये बरामद किए जाएंगे। इसके साथ ही फर्जी पीपीओ की बरामदगी के साथ ही अन्य साथियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
आरोपी थर्ड पार्टी को देते थे मोटा कमीशन
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन, ग्रेच्युटी व अन्य भत्तों का भुगतान करने के नाम पर योगेश लांबा व राघव वधवा द्वारा थर्ड पार्टी के खातों में रकम जमा कराई जाती थी। इसके बदले में थर्ड पार्टी को हजारों रुपये मोटा कमीशन दिया जाता था। बिना किसी मेहनत के खाता धारक को हजारों रुपये मिल जाते थे। अपना कमीशन रखने के बाद वह बकाया राशि आरोपियों को लौटा देते थे।
ऐसे खुली थी केस की परत
इसराना के गांव कारद निवासी टैक्सी चालक सुरेश कुमार ने थाना समालखा में केस दर्ज कराया था कि लोन के नाम पर उसके बैंक खाते में करीब तीन लाख रुपये जमा कराए गए हैं। बाद में समालखा निवासी अजय शर्मा उनसे रकम यह कहकर ले गया कि उसके खाते में गलती से राशि जमा हो गई थी। जांच करने पर पता चला कि उसके खाते में जो रुपये जमा हुए थे, वे बैंक से मिले लोन के नहीं बल्कि बिजली निगम के खाते से आए थे, जिस पर उसने फर्जीवाड़े में उसके बैंक खाते का प्रयोग होने की आशंका में आठ फरवरी को समालखा थाने में केस दर्ज कराया था।