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महिला ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया: फिर बताया गलतफहमी, नाराज हाईकोर्ट ने ठोका एक लाख रुपये का जुर्माना

Sat, 23 May 2026 02:10 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के दुस्साहस महिलाओं की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाते हैं इसलिए ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है। अदालत ने आदेश दिया कि शिकायतकर्ता एक माह के भीतर एक लाख रुपये जमा करे।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सामूहिक दुष्कर्म जैसा गंभीर आरोप लगाने के बाद में उसे गलतफहमी बताना महिला को भारी पड़ गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महिला पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार का आरोप लगाने के बाद इसे गलतफहमी बताना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इससे महिलाओं की गरिमा भी प्रभावित होती है।
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याचिका दाखिल करते हुए समझौते के आधार पर एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत ने एफआईआर रद्द तो कर दी लेकिन शिकायतकर्ता के आचरण पर टिप्पणी करते हुए उस पर एक लाख रुपये तथा आरोपी पक्ष को 10-10 हजार रुपये जुर्माना जमा कराने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट को बताया गया कि पहले एक समन्वय पीठ ने दोनों पक्षों को इलाका मजिस्ट्रेट/ट्रायल कोर्ट के समक्ष बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद पठानकोट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता स्वेच्छा से और बिना किसी दबाव, डर या प्रलोभन के हुआ है। राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के वकील ने भी एफआईआर रद्द करने का विरोध नहीं किया।
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कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने कई व्यक्तियों पर सामूहिक दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगाए लेकिन घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने में हुई देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया। आरोपों की पुष्टि के लिए कोई चिकित्सीय साक्ष्य भी नहीं था। बाद में शिकायतकर्ता ने समझौता करते हुए कहा कि एफआईआर गलतफहमी के कारण दर्ज हुई थी। आरोपों को गलतफहमी का परिणाम बताना स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि शिकायतकर्ता ने कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए अधिकारियों को गुमराह किया और आरोपियों पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की।

अदालत ने कहा कि इस प्रकार के दुस्साहस महिलाओं की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाते हैं इसलिए ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है। अदालत ने आदेश दिया कि शिकायतकर्ता एक माह के भीतर एक लाख रुपये जमा करे। यदि वह राशि जमा नहीं करती या आरोपियों पर उसकी ओर से राशि भरने का दबाव बनाती है तो राज्य सरकार उसकी संपत्तियां और परिसंपत्ति अटैच कर भू-राजस्व बकाया की तरह वसूली करेगी।
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