चंडीगढ़। किसी भ्रष्ट कर्मचारी के खिलाफ ट्रैप लगाने से पहले विजिलेंस को उच्च अधिकारियों की पूर्व अनुमति अनिवार्य करने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि अधिकारियों पर ट्रैप लगाने से पहले उच्च अधिकारियों की अनुमति अनिवार्य क्यों की गई है।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने हाईकोर्ट को बताया कि हरियाणा सरकार ने सर्कुलर जारी कर विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों द्वारा ट्रैप लगाने से पहले उच्चाधिकारियों की पूर्व अनुमति को अनिवार्य किया है। सर्कुलर के अनुसार किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ ट्रैप लगाने से पहले संबंधित विभाग के अध्यक्ष तथा किसी आईएएस या आईपीएस के खिलाफ ट्रैप लगाने के लिए मुख्य सचिव की अनुमति लेना अनिवार्य है। याची ने कहा कि इस सर्कुलर के चलते सूचना लीक होने की संभावना बनी रहती है और अक्सर छापे से पहले सूचना संबंधित व्यक्ति तक पहुंच जाती है। भ्रष्टाचार निरोधक कानून को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए इस सर्कुलर पर रोक लगाना बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा जारी इस सर्कुलर पर हैरानी जताते हुए पूछा कि कैसे इस प्रकार का प्रावधान किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने अब हरियाणा सरकार को दो सप्ताह की मोहलत देते हुए इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।