कहते हैं जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं और इंसान उसे धरती पर ढूंढता है। चाहे चंद कदमों में मिल जाए या फिर सात समंदर पार मिले। ऐसे ही प्यार के गवाह हैं पंचकूला सेक्टर-12 के मकान नंबर-212 में सैकड़ों पक्षी, पालतू जानवर और हजारों पेड़-पौधों के बीच 37 साल से जिंदगी गुजार रहे प्रवीण चड्ढा और डीईई चड्ढा। इनका प्यार प्रकृति की वजह से सात समंदर पार अमेरिका में परवान चढ़ा और आज दोनों मिसाल बन गए हैं।
अमेरिका में प्रवीण को जीवनसाथी चुनने के बाद अमेरिका निवासी युवती डीईई ने एक तरफ जहां भारतीय संस्कृति को अपनाया, वहीं प्रवीण की माता ने उसको बेटी की तरह अपनाया। इस तरह दोनों का रिश्ता समय के साथ मजबूत होता चला गया। दोनों कहते हैं कि पूरे प्रकृति को अपने घर में बसा रखा है, यही वजह है कि हम दोनों 14 फरवरी को ही नहीं, अपना हर दिन को वैलेंटाइन-डे की तरह मनाते हैं। दोनों कहते हैं कि पर्यावरण को संतुलित रखने में पेड़-पौधों के साथ ही पशु-पक्षियों की भूमिका भी अहम है, लेकिन मनुष्य के अत्यधिक हस्तक्षेप के कारण इन सबकी संख्या कम होती जा रही है। यदि जल्द नहीं चेते तो स्थिति भयावह हो सकती है। इन्हें अपनाइए और अपना हर दिन वैलेंटाइन-डे की तरह मनाइए।
1983 में हमसफर बने
प्रवीण चड्ढा अमेरिका में अपना रेस्टोरेंट चलाते थे। डीईई वहां बतौर मैनेजर काम आईं थीं। दो साल प्रवीण के साथ काम करने के बाद डीईई प्रवीण की बहन से मिली तो उनका नेचर उन्हें काफी पसंद आया। भाई प्रवीण को उन्होंने कहा कि अपने वतन में मां-बाउजी तुम्हारे लिए रिश्ता ढूंढ रहे हैं, तुम दोनों प्रकृति के बारे में इतना सोचते हो, एक दूसरे का ध्यान रखते हो, तुम्हारा हमसफर तो तुम्हारे पास है।
बस इसे परखने की जरूरत है। बहन की बात पर भाई ने ध्यान दिया और डीईई उन्हें धीरे-धीरे पसंद आने लगीं। जब प्रवीण ने अचानक डीईई को प्रपोज किया तो उन्होंने भारत के बारे में पूछा और जानने की इच्छा जाहिर की। प्रवीण ने देश की मिट्टी की सौंधी खुशबू और अपने वतन का प्यार कुछ इस तरह बयान किया कि डीईई भारतीय संस्कृति को अपनाने के लिए तैयार हो गईं और आज 37 सालों से एक दूसरे के साथ हैं।
पौधों और पक्षियों से ऐसे सजा है संसार
प्रवीण चड्ढा के घर में देसी और विदेशी मिलाकर 45 से ज्यादा पक्षी हैं। उनकी बागवानी में संतरा, अमरूद, सेब, चीकू, आम, लीची, नींबू से जुड़े 50 से ज्यादा फलों के पेड़ लगे हैं। इसके अलावा फूलों और सजावटी पौधों की तो गिनती करना मुश्किल है। ये पति-पत्नी दोनों पूरे दिन पौधों, पालतू जानवरों और पक्षियों की सेवा में जुटे रहते हैं।