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राष्ट्रीय संपत्तियों को बेचने से बढ़ेगी बेरोजगारी : नंदिता

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पंचकूला। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की सचिव नंदिता हुड्डा ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के जरिए करोड़ों की राष्ट्रीय संपत्ति को निजी हाथों में कौडियों के दाम पर देने पर प्रतिक्रिया दी है। हुड्डा ने कहा कि उपक्रम बेचने में कोई भी स्पष्ट मापदंड नहीं, ना कोई स्पष्ट मूल्यांकन हैं। मनमाने निजीकरण से भारतीयों के साथ खिलवाड़ और पूंजीपतियों को मालामाल करना एक मात्र लक्ष्य रखा गया है।
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मनमाने फैसले पर किसी के साथ कोई विचार नहीं किया गया। निजीकरण से दाम बढ़ेंगे और रोजगार घटेगा, नौकरियां नष्ट होंगी। अगर कहीं पर निजी क्षेत्र मिलकर एकाधिकार बना सकता है तो वहां पर सरकार का होना जरूरी है, जिससे आम उपभोक्ता का शोषण न हो। उन्होंने कहा कि रेलवे हमारे देश की जीवन रेखा है। करोड़ों की जनता के लिए आवागमन का सबसे सस्ता साधन है। इससे कितने ही लोगों को रोजगार मिलता है। इसके निजीकरण से पहले इंकार करने के बाद अब केंद्र सरकार इसे निजी हाथों में क्यों दे रही है।
70 साल में बने उपक्रम को भाजपा बेच रही
किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार होने से उपभोक्ता की ताकत कम हो जाती है। निजी क्षेत्र दाम तो बढ़ाता ही है, वह लोगों को बिना पलक झपकाए नौकरी से भी निकालता है और आने वाले दिनों में रोजगार के साधनों को लगातार खत्म कर दिया जाएगा। इसका कुप्रभाव देश के छोटे मझोले व्यापारों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बहुत सारे उपक्रमों को बनाने में मजबूत इरादा, दृढ़ विश्वास और राष्ट्र की पूंजी लगी है। यह कांग्रेस की उपलब्धि है कि ब्रिटिश हुकूमत के 200 साल बाद नेहरू जी और कांग्रेस की सरकारों ने दोषारोपण करने के बजाय राष्ट्रनिर्माण में अपना योगदान दिया, जिसका नतीजा है कि 70 साल में बनाए हुए उपक्रम आज भाजपा सरकार बेच रही है। नंदिता हुड्डा ने कहा कि मोदी सरकार दंभ छोड़े, देश हित में फैसला वापस ले।
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