चंडीगढ़। संयुक्त किसान मोर्चा का एक प्रतिनिधिमंडल किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल की अगुवाई में सोमवार को चंडीगढ़ में पहुंचा। किसान नेता मुख्यमंत्री आवास के बाहर एकत्रित हुए और धान की खरीद शुरू करने व डायमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद की कमी पूरी होने की मांग की। इसके बाद ही कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री ने आढ़तियों के साथ बैठक करके सभी मुद्दों का समाधान कर दिया है, जिसके चलते अब मंडियों में धान की खरीद शुरू हो जाएगी। साथ ही 2.50 लाख मीट्रिक टन डीएपी खाद राज्य को आवंटित की गई है, इसलिए डीएपी खाद की आगे कोई समस्या नहीं होगी। इससे पहले किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि 1 अक्तूबर से धान की खरीद शुरू होती है, लेकिन इस बार यह खरीद शुरू न होने से किसानों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है कि धान की खरीद को लेकर इतना बड़ा संकट पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि एक महीने पहले सीएम मान को सभी हितधारकों के साथ बैठक करनी चाहिए थी और उनके मुद्दों का समाधान करना चाहिए था। साथ ही उन्होंने डीएपी खाद की कमी का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही नैनो यूरिया खरीदने के लिए भी उनको मजबूर किया जा रहा है।
इस पर कृषि मंत्री ने कहा कि खरीफ सीजन की मांग को पूरा करने के लिए अक्तूबर के लिए 2.50 लाख मीट्रिक टन डीएपी खाद आवंटित की गई है। इसमें से राज्य को पहले ही 22,204 मीट्रिक टन डीएपी प्राप्त भी हो चुकी है और 15,000 मीट्रिक टन और खाद जल्द ही प्राप्त हो जाएगी। राज्य को अब तक लगभग 1.77 लाख मीट्रिक टन डीएपी प्राप्त हो चुकी है। इसके साथ ही अब तक 51,612 मीट्रिक टन डीएपी के बराबर फॉस्फेट के अलग-अलग विकल्प भी प्राप्त हुए हैं, जिससे कुल उपलब्धता 2,27, 563 मीट्रिक टन हो जाएगी। खाद का यह वितरण कृषि उत्पादन को बढ़ाने और किसानों की बुवाई जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है।
कृषि मंत्री ने कहा कि सहकारी सभाओं को डीएपी 60 फीसदी आवंटित की जा रही है, जबकि बाकी 40 फीसदी खाद डीलरों को दी जाएगी। डीएपी और अन्य खादों के साथ-साथ किसी भी उत्पाद की कालाबाजारी या टैगिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में मुख्य सचिव अनुराग वर्मा, विशेष मुख्य सचिव कृषि केएपी सिन्हा और इंटेलिजेंस चीफ आरके जैसवाल शामिल थे। इसी तरह किसानों की तरफ से राजेवाल के अलावा रुलदू सिंह मानसा, बूटा सिंह बुरजगिल्ल, हरिन्दर सिंह लक्खोवाल, हरमीत सिंह कादियां और रमिन्दर सिंह समेत अन्य नेता मौजूद थे।