एसीसी प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त मामले में चौंका देने वाला खुलासा हुआ है। दरअसल हरियाणा सीएजी की टीम ने जून 2023 में एसीसी प्लांट के आसपास की 122 एकड़ जमीन का सर्वे किया था। सर्वे में जिस जमीन को 2021 में बेचा था, सीएजी ने उसमें 32 करोड़ रुपये स्टाम्प ड्यूटी चोरी की रिपोर्ट तैयार की है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार सरकार की ओर से सीएजी की रिपोर्ट पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि एसीसी की प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सरकार की तरफ से जमीन की रजिस्ट्री के 21 माह बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।
रेजिडेंशियल एरिया बनाने के लिए ली जानी थी सीएलयू
जिस कंपनी ने एसीसी की प्रॉपर्टी खरीदी है, उसके द्वारा सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रेजिडेंशियल एरिया बनाने के लिए सीएलयू लेने की कोशिश की जा रही है। दूसरी तरफ हरियाणा कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट ने 21 माह में करीब दर्जनभर से ज्यादा बार चिट्ठी लिखकर एसीसी की करीब 122 एकड़ जमीन की मलकियत विभाग के नाम ट्रांसफर करने को लेकर पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है, ना ही मलकियत ट्रांसफर की गई है।
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के आदेशों पर 9 फरवरी 2023 को भी अतिरिक्त मुख्य सचिव इंडस्ट्रीज एवं कॉमर्स विभाग ने भी राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र भेजकर एसीसी सूरजपुर की जमीन का राजस्व रिकार्ड में नाम इंडस्ट्रीज विभाग के नाम पर करने और इस जमीन के हस्तांतरण पर रोक लगाने को कहा था।
सीबीआई से जांच कराने की मांग
एडवोकेट विजय बंसल ने भूपेंद्र सीमेंट वर्क्स सूरजपुर पंचकूला में एसीसी लिमिटेड द्वारा 2040 करोड़ के घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। इससे पूर्व भी विजय बंसल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री मनोहर लाल और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर इस मामले में संज्ञान लेने के लिए कहा था।
विजय बंसल द्वारा भेजे पत्र पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने भी 28 जुलाई 2006 को संज्ञान लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा को चिट्ठी लिखकर इस जमीन का सीएलयू न बदलने के लिए कहा था।
मशीनरी उखाड़ बेचने की मांगी इजाजत
एडवोकेट विजय बंसल ने बताया कि लीज डीड खत्म होने के बाद जमीन भवन एवं मशीनरी, हरियाणा सरकार की होनी थी, जिसके लिए 8 मई 1998 को तत्कालीन हरियाणा सरकार ने आदेश पारित कर एसीसी फैक्टरी की जमीन और मशीनरी को हरियाणा सरकार के सुपुर्द करने को कहा गया, लेकिन कंपनी ने उल्टा सरकार के विरुद्ध ही माननीय हाईकोर्ट में 8033/1998 केस दायर कर दिया और मशीनरी उखाड़ कर बेचने की इजाजत मांगी, परंतु कंपनी को मशीनरी को बेचने की इजाजत आज तक नहीं मिली है।
वास्तविकता में सूरजपुर स्थित फैक्ट्री में मशीनरी नहीं है। विजय बंसल ने 1 अगस्त 2018 को उद्योग विभाग हरियाणा से पूछा था कि माननीय हाईकोर्ट में जो यह केस विचाराधीन है उस पर आपका विभाग क्या कार्यवाही कर रहा है। इस पर विभाग ने सूचित किया कि इस केस से संबंधित फाइल गुम हो गई है। इसकी डीडीआर पुलिस थाना, सेक्टर-17 चंडीगढ़ में दर्ज है।
विजय बंसल ने जिला राजस्व अधिकारी से आरटीआई के माध्यम से पूछा था कि महाराजा पटियाला द्वारा पट्टे पर दी गई जमीन एसीसी कंपनी के नाम कैसे हुई, जिसपर राजस्व विभाग ने जवाब दिया कि 1960-61 से पहले का रिकार्ड मौजूद नहीं है। न ही इस कार्यालय में लीज पर दी गई भूमि का राजस्व रिकार्ड उपलब्ध है।