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नाबालिग की जान को खतरा, सिर्फ इस आधार पर नहीं किया जा सकता जमानत से इनकार: हाईकोर्ट

Sun, 02 Aug 2020 11:40 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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नाबालिग आरोपी को केवल इस आधार पर जमानत ना देना कि उसकी जान को खतरा है न्याय की हत्या है। नाबालिग की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसके परिवार की है और यदि उसके परिवार को ऐसा लगता है तो वह राज्य सरकार से सुरक्षा की गुहार लगा सकते हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए नाबालिग याचिकाकर्ता को जमानत दे दी है।
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मानसा निवासी रिंकू सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि जसप्रीत सिंह ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसके भाई ने रिंकू कौर से प्रेम विवाह किया था जिससे उसे एक बच्चा हुआ था। इस विवाह से रिंकू कौर के घरवाले खुश नहीं थे। इसी बीच रिंकू सिंह ने शिकायतकर्ता के भाई को बातचीत के लिए बुलाया जिसके बाद से वह गायब था।

इसके बाद जब तलाश की गई तो शिकायतकर्ता के भाई का शव आधा जला हुआ और बंधा हुआ मिला जिसके चलते रिंकू कौर के घरवालों और रिंकू सिंह जिसने शिकायतकर्ता के भाई को मिलने के लिए बुलाया था उन पर एफआईआर दर्ज की गई। इस मामले में एफआईआर के समय रिंकू सिंह 16 वर्ष 1 माह का था और तब से बाल सुधार गृह में है।
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फैमिली कोर्ट ने उसे यह कहते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया कि यदि उसे जमानत दी गई तो शिकायतकर्ता के परिवार से उसे जान का खतरा है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए कहा नाबालिग होने के नाते ट्रायल लंबित रहने तक याचिकाकर्ता को जमानत का अधिकार है और यह अधिकार केवल यह कहकर नहीं छीना जा सकता कि याचिकाकर्ता को जान का खतरा है।
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