कोर्ट ने कहा कि भले ही बच्ची अपने दादा-दादी के साथ रहना चाहती है, क्योंकि वह साढ़े चार साल की है और पिछले दो साल से अपनी मां से दूर है, लेकिन सबसे ऊपर उसका हित है। बच्ची को नहीं पता कि उसका हित किसमें है।
कोरोना के कारण ढाई साल अपने से दूर रही बच्ची को पाने के लिए मां की ओर से दाखिल याचिका को मंजूर करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्ची के दादा-दादी को आदेश दिया है कि वह बच्ची को उसकी मां को सौंप दें। आस्ट्रेलिया में रह रही मां ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
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महिला ने याचिका में बताया कि वह शाहाबाद की रहने वाली है और उसका विवाह 2017 में कुरुक्षेत्र में हुआ था। इसके बाद वह पति के साथ आस्ट्रेलिया चली गई। इस बीच उसने एक बच्ची को जन्म दिया। इसके कुछ समय बाद उसके सास-ससुर आस्ट्रेलिया आए और बच्ची को अपने साथ अंबाला लेकर आ गए, क्योंकि अंबाला कैंट में भी उनका घर है। याची और उसके पति को भी कुछ दिन बाद ससुराल अंबाला आना था। इसी दौरान कोरोना महामारी के कारण विमान सेवा बंद हो गई और याची दो साल बाद मार्च 2022 में भारत पहुंची।
जब वह अंबाला से अपने मायके शाहाबाद जाने लगी तो याची के सास-ससुर ने बच्ची को याची के मायके ले जाने से इनकार कर दिया। याची ने बहुत प्रयास किया, लेकिन सास-ससुर ने बच्ची को साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी। अब याची ने अपनी बच्ची को पाने के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। सुनवाई के दौरान जब हाईकोर्ट ने बच्ची की मर्जी जानी तो बच्ची ने अपने दादा-दादी के साथ रहने की इच्छा जताई। कोर्ट ने कहा कि भले ही बच्ची अपने दादा-दादी के साथ रहना चाहती है, क्योंकि वह साढ़े चार साल की है और पिछले दो साल से अपनी मां से दूर है, लेकिन सबसे ऊपर उसका हित है।
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बच्ची पांच साल से कम उम्र की है और उसे नहीं पता कि उसका हित किसमें है। ऐसे में उसे उसकी मां को सौंपा जाना चाहिए। इस दौरान बच्ची के दादा-दादी ने कहा कि उन्हें भी बच्ची के साथ रहने का हक मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बच्ची के दादा-दादी अंबाला में रहते हैं और बच्ची की मां और पिता आस्ट्रेलिया में। ऐसी स्थिति में बच्ची को कुछ समय माता-पिता और कुछ समय दादा-दादी के साथ रहने का आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए बच्ची के दादा-दादी को आदेश दिया कि वह बच्ची को उसकी मां को तीन सप्ताह के भीतर सौंप दें।