चंडीगढ़। किसान-मजदूर मोर्चे के नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि पंजाब सरकार के साथ बैठक में कई मांगों पर सहमति बन गई है लेकिन शंभू-खनौरी बॉर्डर के मुआवजे पर फिलहाल पेंच फंसा हुआ है जिसके लिए 22 दिसंबर को दोबारा बैठक होगी। पंजाब सरकार ने बिजली संशोधन बिल का विरोध करने का आश्वासन दिया है जिसके चलते रेल रोको आंदोलन को स्थगित कर दिया गया है। पंधेर शनिवार को प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मनरेगा समाप्त करने, बीज बिल, अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते और बिजली बिल के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से इसकी मांग की है क्योंकि 30 दिसंबर को सरकार ने विशेष सत्र बुला लिया है।
पंधेर ने कहा कि अगली बैठक में शंभू और खनौरी बॉर्डर पर हुए नुकसान को लेकर बातचीत की जाएगी। मोर्चे को हटाने के दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉली, स्टेज, टेंट, लंगर का सामान, एसी-कूलर सहित बड़े स्तर उनका नुकसान हुआ है। सिर्फ शंभू में करीब 3.77 करोड़ रुपये का नुकसान का किसान दावा कर रहे हैं।
दोनों मोर्चे पर पूरा गांव बसाया गया था जहां जरूरत का हर सामान उपलब्ध था। पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है। आए दिन गोली चलने जैसी घटनाएं हो रही हैं लेकिन सरकार सिर्फ किसानों के प्रदर्शनों पर ही सवाल उठा रही है।
किसान नेता बलदेव सिंह जीरा ने कहा कि सरकार बिजली संशोधन बिल का विरोध करेगी। इस संबंध में पहले ही सीएम भगवंत मान का बयान आ चुका है। राज्य सरकार ने इसके विरोध में केंद्र को पत्र भी लिखा है जिसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। बैठक में पराली संबंधी पर्चे रद्द करने मांग भी रखी है जिस पर भी सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है।
बाढ़ से नुकसान पर अधिक मुआवजे की मांग अगली बैठक में
जीरा ने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान पर अधिक मुआवजे की मांग अगली बैठक में रखी जाएगी। आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के परिजनों को नौकरी पर भी सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। सरकार के इस रुख और शहीदी जोड़ मेल के कारण ही फिलहाल रेल रोको कार्यक्रम को स्थगित किया गया है।
मोर्चे ने कहा कि लैंड-पूलिंग नीति अभी खत्म नहीं हुई है। मोहाली के पांच गांवों में भूमि अधिग्रहण को लेकर नोटिस जारी किया गया है जिसे रद्द किया जाना चाहिए। जीरा ने कहा कि बाढ़-पीड़ित लोगों को मुआवजे से वंचित रहने के मुद्दे पर सरकार ने तत्काल प्रभाव से मुआवजा जारी करने पर सहमति दे दी है।