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सूरजपुर सुखोमाजरी बाईपास: दो साल में मिलनी थी जाम से निजात, पांच साल बाद भी केवल 90 प्रतिशत समस्या हुई कम

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पिंजौर। निर्धारित समय से देरी से हो रहे सुखोमाजरी बाईपास के निर्माण के कारण अभी तक पिंजौर के लोगों को जाम से निजात नहीं मिली है। पिंजौर बाजार सहित गांव बसौंला और धमाला को जाम से निजात दिलाने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 1 मई 2017 को पिंजौर-सुखोमाजरी बाईपास का शिलान्यास किया था। इस परियोजना को दो साल में पूरा होना था, परंतु पांच साल बीतने के बाद भी इस परियोजना का तकरीबन 90 प्रतिशत से ज्यादा काम ही पूरा हो पाया है। अब एनएचएआई के अनुसार मार्च माह के अंत तक पिंजौर शहरवासियों को सूरजपुर सुखोमाजरी बाईपास की सौगात मिल सकती है।
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बाईपास पर रेलवे अंडरब्रिज का निर्माण होना है। इस कारण बाईपास पूरा होने में देरी हो रही है। निर्माणाधीन सूरजपुर सुखोमाजरी बाईपास का निर्माण तकरीबन पूरा हो चुका है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों की मानें तो सूरजपुर सुखोमाजरी बाईपास रोड का ढांचा पूरा हो चुका है परंतु रेलवे का आरयूबी का निर्माण अभी बाकी है। अगर रेलवे आरयूबी का निर्माण कार्य पूरा करवा देता है तो बाईपास निर्माण का काम मार्च तक पूरा हो जाएगा।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी, नालागढ़ और परवाणु की तरफ प्रतिदिन हजारों की संख्या में भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। शहर के मुख्य बाजार से गुजरने वाली सड़क कई जगह से संकीर्ण है। वाहनों की संख्या अधिक होने से शहर में प्रतिदिन जाम या जाम जैसी स्थिति पैदा होना आम बात है। जाम की समस्या के हल करने के लिए सूरजपुर सुखोमाजरी बाईपास का निर्माण करीब पांच साल पहले शुरू हुआ था।
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7700 मीटर है बाईपास की लंबाई
अधिकारियों के अनुसार इस बाईपास की लंबाई 7700 मीटर है। इसका आरंभ सूरजपुर रामपुर सियुडी से होगा और पिंजौर नालागढ़ रोड एनएच-105 पर सिविल एरोड्रोम बसौला के समीप निकलेगा। इसके बनने सेबद्दी की तरफ जाने वाले हजारों भारी और हल्के वाहन शहर से गुजरने की जगह इस बाईपास से बद्दी की तरफ निकल जाएंगे। इस बाईपास के शुरू होने से पिंजौर में लगने वाले जाम से लोगों को निजात मिलेगी।
सूरजपुर सुखोमाजरी बाईपास का निर्माण तकरीबन पूरा हो चुका है। केवल आरयूबी का निर्माण रह गया है। इसके लिए रेलवे विभाग से लगातार बात चल रही है। केवल इसकी वजह से काम में देरी हो रही है। -संजीव राणा जेई एनएचएआई।
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