पंचकूला। पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों में लगातार हो रही वृद्धि के कारण महंगाई की आग किचन से कारोबार तक पहुंच गई है। जनवरी से अक्तूबर तक पेट्रोलियम के दामों में 25 फीसदी तक वृद्धि होने से लोगों के बजट का तानाबाना ही गड़बड़ा गया है। गृहिणियों से लेकर कारोबारियों, यातायात से लेकर होटल-ढाबों तक रोजमर्रा की सभी चीजों के दामों में हुई वृद्धि का असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। इस वर्ष जनवरी से लगातार पेट्रोल-डीजल के रेटों में वृद्धि होने से मालभाड़े में जबरदस्त उछाल आया है। रसोई गैस सिलिंडर के दाम जनवरी से अब तक 205 रुपये बढ़ गए हैं। इस कारण सुबह की चाय से लेकर नाश्ता, लंच और डिनर के अलावा घरों की साजसज्जा और भवन निर्माण की सभी चीजों के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते रेटों का असर सब जगह पड़ा है। इस महंगाई से पेट्रोल पंप संचालक भी परेशान हैं।
पेंट, डिस्टेंपर, इमल्शन भी हुआ महंगा
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल युवा इकाई के प्रदेश प्रभारी राहुल गर्ग ने बताया कि पेट्रोल डीजल की कीमतों में 25 फीसदी इजाफा हुआ है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के साथ महंगाई का असर घर सजाने पर भी पड़ा है। दरअसल, पेट्रोलियम पदार्थों से ही घर सजाने के लिए डिस्टेंपर्स, इमल्शन, पेंट तैयार होते हैं। इस साल जनवरी से 30 सितंबर के बीच पेंट कंपनियां सात बार दाम बढ़ा चुकी हैं। उद्योगों में तैयार की गई सभी चीजों के दाम बढ़ गए हैं।
मिठाई के रेट 40 से 80 रुपये तक बढ़े
केवल ब्रेड नहीं, बल्कि कचौड़ी सहित सभी नाश्तों के रेट भी बढ़ गए हैं। दुकान में काम करने वाले लेबर ने भी अपना मेहनताना भी बढ़ा दिया है। मिठाई की कीमतें 40 से 80 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। मिष्ठान विक्रेता आनंद गर्ग के मुताबिक कामर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतें बढ़ने से भी मिठाइयों सहित सभी चीजों के दामों में बढ़ोतरी हुई है।
60 लाख का टैंकर एक करोड़ में आ रहा
सेक्टर-15 पेट्रोल पंप के मैनेजर लवप्रीत सिंह का कहना है कि पहले जो टैंकर 60 लाख का आता था, अब एक करोड़ में आ रहा है। महंगाई का असर यहां भी नजर आ रहा है। उद्योगपतियों से आनी वाली पेमेंट लेट आ रही है। कोरोना काल में जो सेल गिरी है, वह अभी तक कवर नहीं हो पाई है। पेट्रोल-डीजल में महंगाई का असर सब जगह देखने को मिल रहा है।
ट्रांसपोर्टर पर पड़ रहा सर्वाधिक असर
ट्रांसपोर्टर हर्ष कुमार का कहना है कि डीजल-पेट्रोल के दामों में वृद्धि होने का सबसे ज्यादा असर ट्रांसपोर्टर पर पड़ा है। उनका कहना है कि किराया भाडे़ में दस फीसदी की बढ़ोत्तरी की है। इससे ज्यादा भाड़ा बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं, जबकि तेल के रेट बढ़ते ही जा रहे हैं। दूसरी तरफ उद्योगपति भी माल कम भेज रहे हैं, इसका असर भी ट्रांसपोर्टर पर पड़ रहा है।
इस तरह बढ़े हैं पेट्रोल डीजल के दाम
माह पेट्रोल डीजल
जनवरी 74.97 67.50
फरवरी 72.16 64.46
मार्च 70.88 62.75
अप्रैल 88.30 81.27
मई 88.14 81.13
जून 92.07 85.76
जुलाई 96.27 89.59
अगस्त 99.23 90.23
सितंबर 98.83 90.02
अक्तूबर 101.25 92.98