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हालात : कैसे हो विकास, बंधे हाथों के बॉक्सर हैं पंचकूला के पार्षद, बजट के नाम पर पार्षदों के हाथ हैं खाली, बिना टेंडर के नहीं हो रहा शहर में कार्य

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पंचकूला। पंचकूला के पार्षद बंधे हाथों के बॉक्सर हैं, क्योंकि पार्षदों के पास विकास कार्य करवाने के लिए कोई विशेष फंड नहीं है। ऐसे में छोटे से कार्य के लिए भी दो से तीन माह का समय लग जाता है। पार्षदों के पास फंड की सुविधा नहीं होने के कारण वह जनता के विश्वास को जीत नहीं पा रहे हैं। पार्षदों को वार्ड में विकास कार्य करवाने के लिए नगर निगम के कई नियमों का सामना करना पड़ रहा है। एक छोटा सा विकास कार्य करवाने के लिए भी पार्षदों को पहले मेयर या फिर निगम आयुक्त को प्रार्थना पत्र देना पड़ता है। इसके बाद फाइल तैयार होती है, जो संयुक्त आयुक्त की टेबल से होती हुई सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर, एक्सईएन, एसडीएफ और फिर जेई के पास पहुंचती है।
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जेई विकास कार्य का इस्टीमेट तैयार करता है। इसके बाद इसी चैनल से फाइल वापस निगम आयुक्त के पास पहुंचती है। फिर कहीं जाकर टेंडर प्रक्रिया शुरू होती है। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम दो से तीन महीने का समय लग जाता है। इसके बाद भी पार्षदों को कार्य शुरू करवाने के लिए अधिकारियों के पास कई चक्कर काटने पड़ते हैं।
वहीं, चंडीगढ़ के पार्षदों के पास 80 लाख रुपये का विकास फंड होता है, जिससे वह अपने वार्ड में बिना किसी देरी के विकास कार्य करवा सकते हैं। जबकि, मेयर के पास दो करोड़, सीनियर डिप्टी मेयर के पास 20 लाख और डिप्टी मेयर के पास 10 लाख का फंड होता है। इस फंड को वह शहर के किसी भी वार्ड के विकास कार्य में लगा सकते हैं। पार्षदों का कहना है कि जब यह व्यवस्था चंडीगढ़ में है तो पंचकूला में क्यों नहीं है। जबकि पंचकूला ट्राइसिटी का हिस्सा है।
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पार्षदों के पास कोई अधिकार नहीं है। उन्हें छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए नगर निगम अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सरकार को कम से कम विकास कार्य के लिए 40 से 50 लाख रुपये का फंड पार्षदों को देना चाहिए। - सुशील गर्ग, पार्षद वार्ड नंबर-14
पार्षद पांच हजार रुपए का भी विकास कार्य अपने स्तर पर नहीं करवा सकते हैं। क्योंकि उनके पास कोई फंड नहीं है। इस मुद्दे को सदन की बैठक में भी उठाया जाएगा। पिछले 20 दिन से एक गड्ढे को भरने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा हूं। - राजेश कुमार, पार्षद वार्ड नंबर-9
एक छोटा सा विकास कार्य करवाने के लिए निगम के नियमों से होकर गुजरना पड़ता है। पार्षदों के पास भी 50 लाख रुपए का फंड होना चाहिए। जिसका प्रयोग वह वार्ड में किसी भी कार्य के लिए कर सकें। - उषा रानी, पार्षद वार्ड नंबर-7
विकास कार्य के लिए पार्षदों के पास भी फंड होना चाहिए। जब चंडीगढ़ के पार्षदों के पास फंड है तो पंचकूला में ये कानून क्यों नहीं लागू हो सकता है। वर्तमान में विकास कार्यों को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता है। - संदीप सोही, पार्षद वार्ड नंबर-18
पार्षदों के पास भले ही अपना कोई फंड नहीं है, लेकिन विकास कार्य के लिए निगम के पास पर्याप्त फंड है। यही कारण है कि शहर में विकास कार्य युद्धस्तर पर हो रहे हैं। जिस भी कार्य के लिए पार्षद कहते हैं उसे प्राथमिकता के आधार पर करवाया जाता है। निगम के पास विकास कार्य के लिए फंड की कोई कमी नहीं है। - कुलभूषण गोयल, मेयर पंचकूला।
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