हरियाणा में ब्लैक फंगस के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जबकि इसके इलाज में प्रयोग होने वाले एंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन की शुरू से ही कमी बनी हुई है। इसी के चलते प्रदेश की तकनीकी कमेटी ने अस्पताल में दाखिल प्रत्येक मरीज को 2 इंजेक्शन लगाने की अनुमति दी है।
हालांकि, फंगस के मरीजों को वजन के अनुसार, रोजाना से 4 से 6 इंजेक्शन की जरूरत होती है। लेकिन मरीजों को पूरे इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं और फंगस तेजी से हमला कर रहा है। ऐसे में मरीजों और तीमारदारों की चिंता बढ़ गई है कि दो इंजेक्शन से कैसे फंगस रुकेगा।
प्रदेश में जब से ब्लैक फंगस के केस आए हैं, तभी से इंजेक्शन एंफोटेरेसिन बी की किल्लत है। इस इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से एक प्रदेशस्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह मरीजों का प्रोफार्मा देखने के बाद यह तय करती है कि मरीज को इंजेक्शन की जरूरत है या नहीं। कमेटी की सिफारिश के बाद ही मरीज को इंजेक्शन मिलता है। 31 मई को कमेटी की ओर से प्रत्येक मरीज को 2 इंजेक्शन लगाने की अनुमति दी गई है।
अटके हैं ऑपरेशन, दाखिले के तीन दिन बाद मिला इंजेक्शन
इंजेक्शन की कमी के कारण ब्लैक फंगस के मरीजों के ऑपरेशन अटके हुए हैं। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज हिसार, पीजीआई रोहतक, मेडिकल कॉलेज समेत अन्य कॉलेजों में मरीजों की संख्या के मुताबिक इंजेक्शन नहीं हैं। पिहोवा निवासी सुभाष ने बताया कि उसकी पत्नी को ब्लैक फंगस है। उसे कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया गया। पहले दिन सैंपल लिया और अगले दिन रिपोर्ट आई। इसके बाद प्रफोर्मा भरकर कमेटी को भेजा तो तीसरे दिन उसे इंजेक्शन मिला। वहीं, रोहतक निवासी कर्ण सिंह ने बताया कि दो से तीन दिन बाद इंजेक्शन मिल रहा है।
वैक्सीनेशन भी घटा
कोरोना के केस कम होने लगे हैं, वहीं प्रदेश में कोरोनारोधी इंजेक्शन लगाने की गति में भी कमी आई है। हरियाणा में अब तक 57 लाख से अधिक लोगों को टीका लगाया जा चुका है। पिछले 10 दिनों से औसतन रोजाना 50 हजार के करीब लोगों को टीका लगाया जा रहा है, जबकि इससे पहले प्रतिदिन एक लाख से अधिक का टीकाकरण किया जा रहा था।
दो हजार एंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन और मिले
प्रदेश को 2 हजार एंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन और मिल गए हैं, जबकि विभाग के पास पहले से ही 1200 इंजेक्शन का स्टॉक है। इसके अलावा, सरकार की ओर से पांच हजार इंजेक्शन और खरीदने के लिए आर्डर दिया जा चुका है। 18 मई से लेकर 31 मई तक विभिन्न सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को 3493 इंजेक्शन भेजे जा चुके हैं। इनमें सरकारी कॉलेजों को 1685 और निजी कॉलेजों और अस्पतालों को 1806 इंजेक्शन भेजे गए हैं। मरीजों की संख्या के मुकाबले ये इंजेक्शन कम हैं।