चंडीगढ़। हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने राजभवन कार्यालय निरीक्षण के दौरान सचिव/राज्यपाल के स्टाफ में कार्यरत दोनों हाथों से दिव्यांग कर्मचारी सुनील कुमार को पांव से टाइप कार्य करते देखा तो वे उनके पास रुके बिना नहीं रह सके। उन्होंने सुनील कुमार से लगभग दस मिनट तक विस्तृत बात की और उनके जीवन के बारे में जानकारी हासिल की।
राज्यपाल ने सुनील कुमार के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि वह युवा पीढ़ी के लिए संघर्ष की प्रेरणा है। राज्यपाल ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि हरियाणा रेडक्रॉस सोसाइटी, राज्य बाल कल्याण परिषद, वाणी एवं श्रवण निशक्त जनकल्याण सोसाइटी जैसी संस्थाओं के कार्यक्रमों के साथ राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को हर वंचित व दिव्यांग व्यक्ति तक पहुंचाया जाए। राज्यपाल ने स्टाफ के सभी अधिकारियों को भी कहा कि सभी सुनील कुमार को भरपूर सहयोग दें।
माता-पिता पीजीआई मेें छोड़ गए
सुनील कुमार के जीवन संघर्ष की कहानी किसी बॉलीवुड की फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने माता-पिता के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जब उन्होंने होश भी नहीं संभाला था, तीन-चार साल की उम्र में बिजली का करंट लगने से दोनों हाथ जल गए। पीजीआई, चंडीगढ़ के डॉक्टरों के अनुसार जली हालत में सुनील के माता-पिता ने उसे यहां भर्ती करवाया। उसके बचने की संभावनाएं न के बराबर थी। उसके माता-पिता उसे पीजीआई में ही छोड़ गए। पीजीआई के डॉक्टरों के अथक प्रयासों से सुनील कुमार की जान तो बच गई, लेकिन कंधे तक दोनों हाथ चले गए। साकेत संस्था ने सुनील कुमार को गोद ले लिया और स्कूली शिक्षा भी साकेत हाई स्कूल में हुई।
पेंटिंग में बनाई पहचान
इस दौरान उसने अपने साथियों के साथ पैरों से पेंटिंग करना शुरू किया। उन्होंने पेंटिंग (आर्ट) के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया और बेहतरीन ‘फुट आर्टिस्ट’ के रूप मेें स्थान हासिल किया। सुनील कुमार ने पेंटिंग के क्षेत्र में अनेक मुकाम हासिल किए और इनाम पाए। सन 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा इन्हें ‘बेस्ट क्रिएटिव चाइल्ड’ अवार्ड से नवाजा गया।
रोजगार के लिए सीखी टाइपिंग
इस दौरान सुनील कुमार ने स्थायी रोजगार पाने के लिए भी संघर्ष शुरू किया और अपने पैरों की उंगलियों से टाइप का कार्य सीखा। टाइप सीखने के बाद उन्हें आउटसोर्सिंग के माध्यम से साकेत संस्था में ही नौकरी मिली। यह संस्था महामहिम राज्यपाल के तहत कार्य कर रही है। जब राजभवन के अधिकारियों को सुनील की इस प्रतिभा का पता चला तो इनकी पोस्टिंग राजभवन कार्यालय में सचिव/राज्यपाल स्टाफ में की गई। वर्तमान में सुनील कुमार कंप्यूटर ऑपरेटिंग के साथ-साथ हिंदी व अंग्रेजी की टाइप का कार्य बखूबी करते हैं।