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सेक्टर-19 : बिजली, पानी, गंदगी, लावारिस पशु बने सेक्टर की पहचान, नहीं होती कोई सुनवाई

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पंचकूला। सेक्टर-19 के हालात गांव से भी बदतर हैं। यहां हर साल बारिश में घरों में पानी भर जाता है। तीन से चार दिन बाद सेक्टर की गलियों में झाड़ूू लगता है। सेक्टर की गलियों में चारों तरफ गंदगी फैली रहती है। यहां पेयजल से लेकर पार्क, सड़क, बिजली, जैसी बुनियादी सुविधाओं से रोजाना लोगों को दो चार होना पड़ता है। वहीं पंजाब के साथ लगने वाले सेक्टर-19 में सुरक्षा के बंदोबस्त तक नहीं हैं। यहां बिना सूचना रोजाना दो से तीन घंटे बिजली के कट लगते हैं, शिकायत करने पर भी बिजली कर्मचारी नहीं आते हैं। पार्कों में लंबी-लंबी घास उगी हुई है, यहां बच्चे और बुजुर्ग खड़े भी नहीं हो सकते। लोगों के घरों के बाहर सीवर का पानी बहता रहता है। यहां कम्युनिटी सेंटर तो है, पर जर्जर हालत में। उसके शीशे टूटे हैं, दीवारों से चूना और सीमेंट निकल रहा है।
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सेक्टर-19 में समस्याओं का भंडार
सेक्टर-19 को हमेशा दूसरे सेक्टरों से कटे हुए नजरिए से देखा जाता है। इसके चलते यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना रहता है। यहां तो समस्याओं का भंडार है। सफाई, बदहाल पार्क, जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर यहां के हालात बयान करते हैं। बची कसर ढाई साल से बंद पड़ा सेक्टर का रास्ता पूरा कर देता है। सेक्टर का रास्ता बंद होने की वजह से स्थानीय लोगों को पंचकूला जाने के लिए चार से पांच किलोमीटर पंजाब के रास्ते घूमकर जाना पड़ता है। सेक्टर के लिए यह रास्ता कब तक खुलेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। ओवरब्रिज खोलने के लिए तीन बार अगस्त, नवंबर के बाद अब मार्च की तारीख मिली है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं की मार्च तक सेक्टर के लोगों के लिए रास्ता खुल जाएगा। - रविकांत स्वामी, पूर्व पार्षद
बरसाती पानी सबसे बड़ी समस्या
हल्की बरसात में सेक्टर-19 के लोगों की धड़कने बढ़ने लगती है। स्थानीय लोगों की शायद ही बारिश में कोई ऐसी रात गुजरी हो, जिस रात यहां के लोग चैन से सो पाए हों। वजह है सेक्टर-19 से गुजर रहे नाले का बंद होना। पड़ोसी प्रदेश के लोगों ने ऐसा अवैध कब्जा किया कि कुदरत के बहाव को ही बंद कर दिया। नतीजा बरसात में सारा पानी सेक्टर के घरों में घुस जाता है। पानी की निकासी नहीं होने से सेक्टर के 300 घर प्रभावित होते हैं। ये घर सेक्टर के निचले क्षेत्र में स्थित है। जब भी बारिश होती है तो इन घरों पर पानी घुस जाता है। नतीजा लोगों का लाखों रुपये का सामान हर साल बर्बाद होता है। इन घरों में हुडा के दो मरले के प्लाट भी शामिल हैं। - कमलेश लोहाट, प्रधान, रेजिडेंट्स हाउस ऑनर वेलफेयर एसोसिएशन
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सीवर सिस्टम की व्यवस्था नहीं की
प्रशासन ने जब सेक्टर बसाया था तो सीवरेज सिस्टम का भी प्रबंध किया था।नतीजा आए दिन यहां सीवरेज ओवर फ्लो होते रहते हैं। सफाई कर्मी चार दिन बार सेक्टर में झाड़ू लगाने आते हैं। यहां सड़कों पर लावारिस पशु घूमते रहते हैं। आवारा कुत्तों से भी लोग परेशान हो चुके हैं। यहां का ग्रीन पार्क साफ सफाई के अभाव में जंगल बना हुआ है।पार्कों में लगे हाई मास्क लाइट बंद रहते हैैं। -मीनाक्षी, न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी
सुबह 9 बजते ही बंद हो जाता है पानी
सुबह पांच बजे के बाद पानी आता है और 9 बजे के पहले चला जाता है। यहां कम दबाव भी पानी की समस्या है। बिना सूचना यहां बिजली कट लगते हैं, रोजाना दो से तीन घंटे सर्दियों में भी बिजली का कट लग रहा है। यहां सड़कों पर लावारिस पशु झुंड में घूमते रहते हैं। लावारिस कुत्ते आए दिन यहां लोगों को काटते रहते हैं। - शीला, स्थानीय निवासी
लावारिस कुत्तों से परेशान हैं सेक्टर के लोग
यहां लावारिस कुत्तों से पूरे सेक्टर के लोग परेशान हैं। 29 दिसंबर को एटीएम से पैसे निकलवाने जाते समय उनके पति को लावारिस कुत्ते ने काट लिया था। यहां मार्केट में कई लोगों को कुत्ते काट चुके हैं, लेकिन इस तरफ नगर निगम का ध्यान नहीं है। वहीं लावारिस पशु सड़कों और पार्कों में बैठे रहते हैं। - अंजली शर्मा, स्थानीय निवासी
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