चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकारों को सरेंडर करने वाला बयान वापस लेने का अल्टीमेटम दिया है। बयान वापसी के लिए शिअद ने 20 जुलाई तक का समय दिया है। ऐसा न करने पर शिअद ने प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी दी है। मंगलवार को शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल की अध्यक्षता में हुई कोर कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया। चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में हुई कोर कमेटी की बैठक में चंडीगढ़ में हरियाणा को अलग विधानसभा बनाने के लिए जमीन आवंटित करने के फैसले को अवैध बताया।
कमेटी सदस्यों ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को सभी हितधारकों से परामर्श किए बिना आवंटन का कोई अधिकार नहीं है। कमेटी सदस्यों ने कहा कि जिस तरह से मुख्यमंत्री ने हाल ही में पंजाब विरोधी रुख अपनाया है, उससे स्पष्ट हो गया है कि वह आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल के निर्देशों पर काम कर रहे हैं, जो हरियाणा में पार्टी को मजबूत करने के लिए पंजाब के हितों का बलिदान देने के लिए तैयार हैं। इसमें मुख्यमंत्री से भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के कर्मचारियों के लिए केंद्रीय वेतनमान लागू करने और 20 जुलाई तक पंजाब विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय में बदलने के प्रयास सहित पंजाब के सभी मुद्दों पर रुख स्पष्ट करने की मांग की गई है।
दूसरे दलों से संपर्क के लिए बनाई कमेटी
चंडीगढ़ से जुड़े सभी मुद्दों पर पंजाब सरकार का रुख स्पष्ट नहीं किए जाने के विरोध में शिअद दूसरे दलों से संपर्क साधेगा। इसके लिए कोर कमेटी की बैठक में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इसमें शिअद नेता बलविंदर सिंह भूंदड़, प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा और सिकंदर सिंह मलूका को शामिल किया गया है।
ये रहेगी आंदोलन की रूपरेखा
शिअद की कोर कमेटी ने 19 जुलाई को दिल्ली के जंतर मंतर पर और 20 जुलाई को दिल्ली के मुख्यमंत्री के आवास पर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय किया है। कमेटी ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई के मामले को लटका रहे हैं, इसके विरोध में उनके आवास के सामने धरना दिया जाएगा।
एसवाईएल पर ट्रिब्यूनल बनाने की निंदा
कोर कमेटी ने नार्थ जोन काउंसिल की बैठक में एसवाईएल के मुद्दे पर निर्णय देने के लिए ट्रिब्यूनल बनाने के लिए आप के मंत्री के आह्वान की निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी ट्रिब्यूनल की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि एसवाईएल जिस जमीन पर बनाई जानी थी, वह मौजूद ही नहीं है, क्योंकि उसे पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल ने किसानों को वापस कर दिया था।
राघव चड्ढा की नियुक्त को असंवैधानिक बताया
कोर कमेटी की बैठक में राघव चड्ढा के सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति को असंवैधानिक बताया। कमेटी ने कहा कि जिस व्यक्ति ने संविधान की शपथ नहीं ली है, उसे आधिकारिक फाइलें नहीं दिखाई जा सकती। यह कदम पंजाबियों द्वारा दिए फतवे के साथ विश्वासघात है। राघव चड्ढा को मुख्यमंत्री अपनी शक्तियां इस तरह नहीं सौंप सकते।