चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) में इंस्पेक्शन के चलते कुछ फाइलों को अधिकारियों की तरफ से लंबित रखा जा रहा था। अब सीएचबी के सीईओ यशपाल गर्ग ने इस मामले में फाइल को लंबित नहीं रखने का आदेश जारी किया है।
अब तक किसी भी संपत्ति को बेचने से पहले सीएचबी से मंजूरी के बाद एक वकील द्वारा संपत्ति की इंस्पेक्शन की जाती है। वकील अपनी टिप्पणी लिखता है कि उसने जांच कर ली है। जब संपत्ति को बेचा जाता है तो फिर सीएचबी की तरफ से उस वकील को एक पत्र भेजा जाता था और पूछा जाता था कि क्या उन्होंने जांच के दौरान कोई कमी पाई थी। इसका जवाब देने के लिए वकील कई महीने का समय लगा देते हैं जिसकी वजह से सीएचबी में फाइल लंबित रह जाती है। बोर्ड ने अब ये तय किया है कि अगर पहली बार की जांच में वकील की तरफ से कोई आपत्ति नहीं जताई जाती है तो वो मान लेंगे कि संपत्ति में कोई समस्या नहीं है। वह बेचने के समय दोबारा वकील को पत्र नहीं लिखेंगे। गर्ग ने आदेश में कहा है कि जब फाइल पर इंस्पेक्शन के दौरान किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं हुई और न ही बाद में कोई ऑब्जेक्शन आया तो फाइल को लंबित रखने का कोई तुक नहीं है। बोर्ड के पास लोगों की शिकायतें आ रही थीं कि इंस्पेक्शन को लेकर उनकी फाइलों को कई महीनों तक लंबित रखा जा रहा है।
लंबित फाइलों को लेकर गर्ग ने की थी समीक्षा, तब सामने आई ये समस्या
सीईओ यशपाल गर्ग ने 4, 5 व 7 जुलाई को लंबित फाइलों को लेकर समीक्षा की थी। इसी दौरान ये सामने आया था कि कुछ अकाउंट अधिकारियों द्वारा फाइलों को ये कहते हुए लंबित रखा जा रहा था कि पूर्व में मालिक, विक्रेता व बैंक या वित्तीय संस्थानों की तरफ से वकील की तरफ से इन फाइलों की इंस्पेक्शन की गई थी जिसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। जब सीईओ की तरफ से इन फाइलों को देखा गया था तो सामने आया कि इंस्पेक्शन के दौरान पहले कोई टिप्पणी नहीं की गई। यही कारण है कि ऐसी फाइलों को लंबित न रखने के अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए।