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नगर परिषद तो बन गई नहीं बढ़ी स्वच्छता दूतो की संख्या

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कालका। नगर परिषद कालका सफाई कर्मचारियों का जबरदस्त टोटा है। 31 वार्डों में जितने भी कर्मचारी कार्यरत हैं, उनके पास सफाई करने के उपकरण नहीं होने की वजह से हाल बेहाल है। कालका और पिंजौर में पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन नहीं होने के बावजूद वर्तमान में कर्मचारी जैसे -तैसे सफाई के काम को अंजाम दे रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार दावे तो बहुत करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। नगर परिषद कालका के अंतर्गत करीब डेढ़ लाख की जनसंख्या है। कालका-पिंजौर में सफाई कर्मचारियों की संख्या 163 के करीब है। इसमें से 20 कर्मचारी नियमित हैं। आठ सफाई दरोगा, छह सुपरवाइजर, चार एएसआई और दो एसआई हैं। इसके अलावा ट्राली हेल्परों की संख्या 15 है। जनसंख्या के हिसाब से कालका-पिंजौर के लिए अभी भी 350 सफाई कर्मचारियों की और आवश्यकता है। सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए प्रत्येक वार्ड में कम से कम चार सफाई कर्मचारी नियमित होने चाहिए।
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हाथ रेहड़ी और रिक्शा की भी है कमी
सफाई कर्मचारियों ने बताया कि उनके पास हाथ रेहड़ी और रिक्शा की भारी कमी है। कालका में केवल दो हाथ रेहड़ियां हैं, जोकि बदहाल अवस्था में हैं। उनसे जैसे-तैसे काम लिया जा रहा है। रिक्शा की संख्या पांच है। पिंजौर में भी तीन के करीब हाथ रेहड़ियां और लगभग 12 रिक्शा हैं। उनसे पूरे शहर की गंदगी उठाई जाती है। कालका नगर परिषद के 31 वार्डों के लिए कम से कम 124 हाथ रेहड़िया और 70 रिक्शा की जरूरत है।
कूड़ा उठाने वाली ट्रालियों की संख्या में भी हो इजाफा
नगर परिषद कालका में कूड़ा उठाने के लिए तीन ट्राली और दो पिकअप हैं। यहां पर आठ ट्रालियों की आवश्यकता है। पिंजौर में दो ट्राली, तीन पिकअप और एक आरसी उपलब्ध है, जबकि यहां की आबादी के हिसाब से दस ट्रालियां, दो पिकअप और होनी चाहिए। सफाई कर्मचारियों ने बताया कि गदंगी साफ करने के लिए जरूरी सामान जैसे कस्सी, पंजे, घास व बूटी काटने वाली तलवार, फिनाइल, तेजाब की भी भारी कमी है।
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बूश कटर मशीन भी करवाई जाए उपलब्ध
सफाई कर्मचारियों ने बताया कि बरसात में जगह-जगह घास उग जाती है। उसको काटने में घंटों लग जाते हैं, इसके लिए बूश कटर मशीन भी कालका नगर परिषद में उपलब्ध करवानी चाहिए। कालका में चार और पिंजौर में भी चार बूश कटर मशीन होनी चाहिए। वर्तमान में कई बार घास और बूटी काटने के लिए पंचकूला से बूश कटर मशीन मंगवाकर काम चलाना पड़ता है।
एक रिक्शा पर तीन से चार कर्मचारी करते हैं काम
सफाई कर्मचारियों ने बताया कि एक रिक्शा पर एक समय में तीन से चार कर्मचारी काम करते हैं ताकि ज्यादा एरिया कवर किया जा सके। कम रिक्शा होने के चलते एक रिक्शे से ही कई गलियों को कवर करना पड़ता है। ऐसे में कई बार तीन या चार कर्मचारी रिक्शा के साथ होते हैं जोकि अपने-अपने एरिया की गंदगी को रिक्शा पर ढोकर उक्त जगह को स्वच्छ रखने में सहयोग करते हैं।
जल्द समस्या का करवाएंगे समाधान
शपथ के बाद सभी समस्याओं का निराकरण करवाया जाएगा। शहर को गंदगी मुक्त करने के लिए डोर-टू-डोर कूड़ा उठवाने की व्यवस्था की जाएगी। सफाई कर्मचारियों को संसाधनों सहित जो भी दिक्कत आ रही है, उसका प्रस्ताव हाउस की मीटिंग में रखेंगे और जल्द उसका समाधान कराया जाएगा। बूश मशीन की भी व्यवस्था करवा दी जाएगी। - कृष्ण लाल लांबा, प्रधान, नगर परिषद कालका
सरकार वैसे तो बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सफाई कर्मचारी दिन-रात शहर को स्वच्छ करने में जुटे रहते हैं। जान की परवाह किए बिना सभी योद्धा कोरोनाकाल में भी अपनी सेवाएं निरंतर देते रहे, लेकिन वर्तमान समय में इनके पास शहर को स्वच्छ रखने के लिए पूरे साधन भी नहीं हैं। यह सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लगा रही है। नगर परिषद का एरिया काफी विस्तृत है। इसके मद्देनजर सफाई कर्मचारियों की संख्या में भी बढ़ोतरी की जानी चाहिए। - प्रदीप चौधरी, विधायक कालका
हम इस बाबत कई बार मांग उठा चुके हैं, धरना दे चुके हैं। उच्चाधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को कई बार रखा जा चुका है। समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। सफाई कर्मचारियों की संख्या में तो इजाफा क्या करना, आलम यह है कि जो सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं उनके पास काम करने के लिए पूरे संसाधन भी उपलब्ध नहीं हैं। - लाखन सिंह, प्रधान, नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा (कालका )
सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया हुआ है। सफाई संबंधी उपकरणों की कमी को जल्द पूरा कर लिया जाएगा। कालका-पिंजौर में बूश कटर मशीन की व्यवस्था करवा दी जाएगी। - मदन लाल, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर परिषद कालका
निदेशालय में डोर-टू-डोर कार्य के लिए अनुमति लिखकर भेजा हुआ है। स्वीकृति मिलने पर यह कार्य प्राइवेट एजेंसी द्वारा करवाया जाएगा। नगर परिषद के कर्मचारी शहर की साफ-सफाई का काम देखेंगे। - निशा शर्मा, ईओ नगर परिषद कालका
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