चंडीगढ़। पंजाब की अदालतों में कार्यरत अनुुसूचित जाति से संबंधित न्यायिक अधिकारियों व कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण दिए जाने की मांग संबंधी एक मामले की सुनवाई करते हुए, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए हैं कि इस व्यवस्था को तुरंत लागू किया जाए।
आयोग के समक्ष गत 8 अप्रैल को दायर एक शिकायत में कहा गया कि पंजाब की अदालतों में अनुसूचित जाति के जजों व अधिकारियों को पदोन्नति में आरक्षण नहीं दिया जा रहा है। इस शिकायत पर सुनवाई करते हुए आयोग ने पाया कि पंजाब सरकार द्वारा राज्य में एससी व ओबीसी (सेवाओं में आरक्षण) एक्ट-2006 कानून पारित किया गया था, जिसके तहत ग्रुप-ए व बी में एससी वर्ग को 14 फीसदी और ग्रुप-सी व डी में एससी वर्ग को 20 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। इसके बावजुद न्यायिक सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं दिया जा रहा है, जो संविधान में एससी वर्ग के लिए प्रदत्त प्रावधानों का भी उल्लंघन है। आयोग ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि उक्त एक्ट को न्यायिक सेवाओं में तुरंत लागू किया जाए।
इस आधार पर आयोग ने लिया फैसला
उल्लेखनीय है कि आयोग ने उक्त शिकायत पर सुनवाई करते हुए 15 सितंबर को पंजाब सरकार की विशेष सचिव (गृह मामले व न्याय) बलदीप कौर, पंजाब -हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल संजीव बेरी, केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के संयुक्त सचिव अंजू राठी राणा को तलब किया था। सुनवाई के दौरान विशेष सचिव बलदीप कौर ने बताया कि पंजाब सरकार के कर्मचारियों के लिए एक्ट-2006 के अनुसार प्रमोशन में आरक्षण लागू है, लेकिन न्यायपालिका के लिए यह व्यवस्था नहीं है। इस पर आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला ने कहा कि ‘बिहार सरकार व अन्य बनाम बाल मुकुंद साहा व अन्य (2000)’ केस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि बिहार राज्य की न्यायपालिका में कार्यरत जज व न्यायिक अधिकारी भी राज्य सरकार के ‘इस्टैब्लिशमेंट’ कैटेगरी में आते हैं। इसी प्रकार पंजाब की विभिन्न अदालतों में जजों और न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति भी राज्य सरकार की ‘इस्टैब्लिशमेंट’ श्रेणी में मानी जानी चाहिए। ऐसे में यह जज और न्यायिक अधिकारी आरक्षण लाभ के हकदार हैं।