पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप गायब करने के आरोपियों को राहत देते हुए एसजीपीसी द्वारा उन्हें बर्खास्त करने का आदेश रद्द कर, उन्हें सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि तीनों कर्मियों को बर्खास्त करने की प्रक्रिया में तकनीकी खामी थी, इसलिए आदेश रद्द किया गया है। एसजीपीसी चाहे तो नए सिरे से तय प्रक्रिया के तहत इन्हें बर्खास्त कर सकती है।
तीनों कर्मियों ने एडवोकेट प्रतीक सोढ़ी के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए कहा कि इस मामले में उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है। जो आरोप लगाए गए उनके बारे में उन्हें कोई जानकारी तक नहीं दी गई। साथ ही फैसला सुनाने से पहले याचिकाकर्ताओं को पक्ष रखने का अवसर तक नहीं दिया गया। जिन दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं, वह उन्हें दिखाए तक नहीं गए। जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें बर्खास्त किया गया है, वह रिपोर्ट तक उन्हें नहीं दी गई।
ऐसे में बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करने की हाईकोर्ट से याचिकाकर्ता ने अपील की। हाईकोर्ट ने तीनों की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए उन्हें सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन तीनों कर्मियों की बर्खास्तगी का आदेश तकनीकी आधार पर रद्द किया गया है। तीनों को बर्खास्त करते समय तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।
अब अगर एसजीपीसी इन कर्मियों पर दोबारा कार्रवाई करना चाहे तो तय प्रक्रिया का पालन कर ऐसा किया जा सकता है। अगर एसजीपीसी को यह लगता है कि तीनों जांच को प्रभावित सकते हैं तो एसजीपीसी उचित आदेश जारी कर सकती है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप गायब होने पर एसजीपीसी ने प्रेस एंड पब्लिकेशन विभाग के सहायक सचिव गुरबचन सिंह, क्लर्क बाज सिंह व एक अन्य को बर्खास्त कर दिया था।