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खारे पानी में झींगा पालन पर मिलेगी सब्सिडी

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पंजाब के दक्षिण-पश्चिमी जिलों में हज़ारों एकड़ ज़मीन खारेपन और सेम से प्रभावित है। राज्य के पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पशु पालन, डेयरी विकास एवं मछली पालन मंत्री तृप्त रजिन्दर सिंह बाजवा ने कहा है कि खारेपन के कारण ऐसे क्षेत्रों में किसी भी फ़सल की काश्त करना बहुत मुश्किल है लेकिन मछली पालन विभाग के प्रयासों से खारेपन और सेम से प्रभावित यह ज़मीन झींगा मछली पालन के लिए वरदान साबित हुई है।
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उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इन क्षेत्रों में झींगा मछली पालन को उत्साहित करने के लिए वचनबद्ध है और विभाग की वित्तीय और तकनीकी सहायता से झींगा मछली पालन के अधीन क्षेत्रफल वर्ष 2019-20 के दौरान बढ़कर 410 एकड़ हो गया है जो वर्ष 2018-19 में 252 एकड़ था। मंत्री ने आगे कहा कि वर्ष 2018-19 के दौरान 520 टन झींगा मछली का उत्पादन हुआ, जो वर्ष 2019-20 के दौरान बढ़कर 750 टन की संख्या पार कर गई। उन्होंने कहा कि किसान 1 एकड़ क्षेत्रफल में झींगा मछली पालन से 120 दिनों में 3-5 लाख रुपये का लाभ कमा सकते हैं।
बाजवा ने कहा, ‘‘मछली पालन विभाग द्वारा किसानों को झींगा मछली पालन के लिए उनकी अपनी स्वामित्व वाली ज़मीन पर 2.5 एकड़ क्षेत्रफल तक वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही थी और अब राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर झींगा मछली पालन को और प्रफुल्लित करने का फ़ैसला किया है। इसलिए अब किसानों को झींगा मछली पालन के लिए वित्तीय सहायता 2.5 एकड़ से बढ़ाकर 5 एकड़ तक कर दी गई है।’’ उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास अपनी ज़मीन नहीं है, वह कम-से-कम 10 वर्षों के लिए ठेके पर ज़मीन लेकर झींगा मछली की काश्त कर सकते हैं।
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