चंडीगढ़। पंजाब सरकार फिर से 1500 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। इस रकम का उपयोग सरकार अपनी चल रही परियोजनाओं और विकास कार्यों को पूरा करने के लिए करेगी।
लगातार बढ़ते कर्ज के बोझ के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। प्रदेश पर वर्ष 2024-25 के दौरान अनुमानित कर्ज 3.82 लाख करोड़ रुपये था। 2025-26 के बजट के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष के अंत तक प्रदेश पर 4.17 लाख करोड़ का कर्ज हो जाएगा। अब 1500 करोड़ का कर्ज लेने के संबंध में राज्य सरकार ने 21 नवंबर को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।
यह कर्ज आठ साल की अवधि के लिए लिया जाएगा और सरकार का दावा है कि 26 नवंबर 2033 तक इस कर्ज को चुका दिया जाएगा। वित्त विभाग के अनुसार 1500 करोड़ का कर्ज खुले बाजार में नीलामी के माध्यम से उठाया जाएगा। इसके अतिरिक्त यह राशि अन्य वित्तीय देनदारियों को पूरा करने में भी खर्च की जाएगी। सरकार इस कर्ज का एक हिस्सा पूर्व में लिए गए कर्जों पर ब्याज भुगतान के लिए भी इस्तेमाल करेगी।
यह राशि राज्य की विकास योजनाओं, आधारभूत ढांचे और अन्य पूंजीगत व्यय पर भी खर्च की जाएगी। प्रदेश में आर्थिक संकट और राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए सरकार नए रोडमैप पर काम कर रही है जिसके तहत आय के स्रोत बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। हाल ही में स्टेट ऑफ बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक रिसर्च रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2026 के दौरान जीएसटी दरों में कटौती के बाद पंजाब के जीएसटी राजस्व में 6.7 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है जिससे सरकार की झोली में 28,507 करोड़ रुपये आएंगे जो राज्य की खराब वित्तीय हालत सुधारने के लिए अच्छे संकेत है।
वित्तीय वर्ष 2025 में जीएसटी से सरकार को 26,721 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था लेकिन वित्तीय वर्ष 2026 में इसमें 1786 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसी तरह अक्तूबर 2025 में 2,311 करोड़ के संग्रह के साथ पंजाब के जीएसटी में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी जबकि अक्तूबर 2024 में प्रदेश का जीएसटी संग्रह 2,211 करोड़ रुपये रहा था।