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हर साल करीब 425 करोड़ रुपये बीबीएमबी को देता है पंजाब, पंजाब के कोटे में नौकरी कर रहे हरियाणा व हिमाचल के मुलाजिम

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चंडीगढ़। पंजाब सरकार हर साल भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में कार्यरत अपने इंजीनियरों व मुलाजिमों के वेतन और बोर्ड के इतर खर्चों में अपने योगदान के रूप में लगभग 425 करोड़ रुपये अदा करती है। लेकिन बीते दस साल से भी अधिक समय से पंजाब सरकार की लापरवाही का आलम यह है कि बोर्ड में खाली हो रहे पंजाब के हिस्से के पदों को भरने के लिए राज्य से नियुक्तियां ही नहीं की जा रहीं।
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नतीजतन बोर्ड में पंजाब और हरियाणा का 58:42 के अनुपात के बावजूद, बीबीएमबी अपने स्तर पर पंजाब के हिस्से के पदों पर हरियाणा और हिमाचल के अधिकारी व मुलाजिम नियुक्त कर काम चला रहा है। लेकिन इन्हें वेतन पंजाब की ओर से हर साल दिए जाने वाले करोड़ों रुपये में से ही अदा किया जाता है। पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय, बीबीएमबी की ओर से पंजाब सरकार से अधिकारियों और मुलाजिमों की नियुक्ति के लिए लगातार पत्र व्यवहार करने पर कई बार पंजाब सरकार की तरफ से बोर्ड को जवाब भी भेजा गया कि पंजाब के पास पावर इंजीनियरों, वर्क्स इंजीनियरों, अधिकारियों और मुलाजिमों की कमी है, इसलिए बोर्ड अपने स्तर पर व्यवस्था कर ले।
ऐसी स्थिति में बीबीएमबी हरियाणा और हिमाचल के अफसरों और मुलाजिमों से पद भरता रहा है। हालांकि यह पूरा मामला अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय ध्यान में आने पर एक कमेटी का गठन भी किया गया, जिसे बीबीएमबी के लिए मैनपावर मुहैया कराने के लिए सुझाव देने का जिम्मा सौंपा गया था। तत्कालीन सिंचाई मंत्री की ओर से इस कमेटी के गठन का आदेश इस आधार पर दिया गया था कि राज्य सरकार बीबीएमबी को तयशुदा रकम की हर साल अदायगी करती है तो बोर्ड में पंजाब के हिस्से के पदों को भरने के लिए राज्य सरकार अलग से भर्ती मुहिम चलाकर सूबे के युवाओं को नौकरी का अवसर दे।
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जानकारी के अनुसार कमेटी का गठन तो हो गया, लेकिन 2017 में कांग्रेस सरकार आने के बाद कमेटी को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और आज तक मामले में कोई फैसला नहीं हो सका। पंजाब सरकार की ओर से हर साल जो रकम बीबीएमबी को दी जाती है, उसमें से बोर्ड के तहत कार्यरत पावर ग्रिडों के रखरखाव और अन्य खर्चों में भी अपने हिस्से का योगदान देना होता है। बीबीएमबी के तहत भाखड़ा बांध, गंगुवाल पावर हाउस, कोटला पावर हाउस, पौंग बांध, देहरा पावर हाउस आदि हाइडल प्रोजेक्ट आते हैं। देहरा और पौंग बांध से राजस्थान का हिस्सा निकालने के बाद इन प्रोजेक्टों से पंजाब को सबसे ज्यादा 51.80 फीसदी, हरियाणा को 37.51 फीसदी, हिमाचल को 7.19 फीसदी और चंडीगढ़ को 3.5 फीसदी बिजली मिलती है।
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