अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जिला अस्पतालों में आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की कमी पर चिंता जताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मालेरकोटला अस्पताल को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर अब पंजाब व हरियाणा को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर कहा था कि मरीजों को मुफ्त इलाज देना राज्य का दायित्व है, आप उन्हें आउटसोर्सिंग कंपनी के मुनाफे का जरिया क्यों बना रहे हो। कोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ को बुनियादी चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर पर 10 सितंबर तक विस्तृत हलफनामा देने का आदेश दिया है। भीष्म किंगर ने पंजाब के मालेरकोटला के सरकारी अस्पताल में चिकित्सा अधिकारियों की भारी कमी और मशीनों की अनुपलब्धता का मुद्दा उठाया था।
पिछली सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था कि एक समय था जब सरकारी स्कूल फलते-फूलते थे, अब हम निजी स्कूलों की ओर भाग रहे हैंं। पंजाब सरकार ने सुनवाई के दौरान बताया था कि मालेरकोटला जिला अस्पताल में 11 नए चिकित्सक नियुक्त किए गए हैं और 9 को तबादले के जरिये लाया गया है। खंडपीठ ने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा है कि चिकित्सा अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद उत्पन्न रिक्ति को भरने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों के संबंध में हलफनामे में खुलासा किया गया है कि 27 मई को ई-टेंडर जारी किया गया था लेकिन कोई बोलीदाता आगे नहीं आया, इसलिए दोबारा टेंडर जारी किया गया। जिला अस्पताल मालेरकोटला में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन की व्यवस्था न होने पर और इसके लिए टेंडर की जानकारी पर हाईकोर्ट ने कहा कि सस्ते दामों पर टेस्ट क्यों, मुफ्त चिकित्सा सेवा प्रदान करना राज्य का संप्रभु कार्य है। हलफनामे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मशीन क्यों नहीं खरीदी जा सकती। मशीनें सरकारी और लोगों के लिए मुफ्त होनी चाहिए, इस विषय पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है।