फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झूरीवाला डंपिंग ग्राउंड के विरोध में प्रदर्शन, वाहन रोके, पार्षद अक्षयदीप चौधरी के नेतृत्व में घग्गर पार निवासियों ने किया विरोध, आरोप-निगम और एचएसवीपी ने जल्दबाजी में लिया फैसला

विज्ञापन
विज्ञापन
पंचकूला। झूरीवाला डंपिंग ग्राउंड का विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। वीरवार को वार्ड नंबर-17 से पार्षद अक्षयदीप चौधरी के नेतृत्व में घग्गर पार क्षेत्र के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने डंपिंग ग्राउंड को जाने वाले नगर निगम के वाहनों को भी रोक दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पार्षद अक्षयदीप चौधरी ने कहा कि निगम और हरियाणा सरकार द्वारा डंपिंग ग्राउंड के विषय में जो फैसला लिया गया है वह जल्दबाजी और असंवेदनशीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के बारे में सरकार को अवगत करवाया है कि इस फैसले से घग्गर पार निवासियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। झूरीवाला के साथ लगते इलाके जैसे मोगीनंद, एतिहासिक स्थल गुरुद्वारा नाडा साहिब, सेक्टर-23, 24, 25, 26, 27, 28, रामगढ़, बन्ना, पुलिस लाइन, आईटीबीपी एरिया के लोगों को डंपिंग ग्राउंड के चलते कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, डंपिंग ग्राउंड से पर्यावरण और वनजीव को भी नुकसान होगा। यमुनानगर हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को भी बदबू और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
विज्ञापन

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल निगम से मांगा जवाब
पार्षद अक्षयदीप चौधरी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल अफसर वीरेंद्र पूनिया के एक बयान का हवाला देकर कहा की प्रदूषण बोर्ड ने एक चिट्ठी के तहत अपना सख्त विरोध जताकर कहा है कि यह असंवैधानिक और अवैज्ञानिक तरीके से झूरीवाला में कूड़ा गिराया जा रहा है तथा मौजूदा समय में निगम के पास इसके लिए वन विभाग, पर्यावरण विभाग और प्रदूषण विभाग से कोई परमिशन नहीं ली गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इसके लिए निगम से जवाब मांगा है। जिसका जवाब अभी तक निगम ने नहीं दिया है।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की मिली थी जमीन
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और एडवोकेट विजय बंसल ने कहा है कि झूरीवाला डंपिंग ग्राउंड के विरोध में आरडब्ल्यूए के साथ मिलकर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। जनहित याचिका के माध्यम से आवाज उठाई जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वन विभाग ने 10 साल पहले एचएसवीपी प्रशासन को यह 5.35 हेक्टेयर जमीन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए दी थी, जबकि यह प्लांट तो बनाया नहीं गया। वहां डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की परमिशन भी 2020 में खत्म हो गई। नियमानुसार 10 साल में एचएसवीपी को जमीन भी वन विभाग प्रशासन को पौधरोपण के लिए स्थानांतरित करनी थी जोकि अब तक नही दी गई है और अब जब डंपिंग ग्राउंड बनाया जा रहा है तो वह भी नियमों की अवहेलना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें