चंडीगढ़। कोरोना वायरस के खौफ ने हर किसी की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच मास्क और हैंड सैनिटाइजर की कालाबाजारी भी धड़ल्ले से हो रही है। यूटी प्रशासन मास्क और हैंड सैनिटाइजर की कालाबाजारी रोकने के लिए कॉमन रेट तय करने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा हुआ तो पूरे शहर में मास्क और हैंड सैनिटाइजर की कीमत एक हो जाएगी।
चिकित्सा विभाग की ओर से एहतियात बरतने की जारी एडवाइजरी के बाद मास्क और सैनिटाइजर बेच रहे दुकानदारों की मौज हो गई है। कई दुकानदार महंगे दामों पर मास्क और हैंड सैनिटाइजर बेच रहे हैं। इसके अलावा कई दुकानदार इनकी जमाखोरी भी कर रहे हैं, ताकि आने वाले महीनों में उन्हें और महंगे दामों पर बेच सकें। ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही प्रशासन इन दोनों के दाम को कॉमन करने की तैयारी कर रहा है। एडवाइजर मनोज परिदा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि प्रशासन को लोगों से लगातार कालाबाजारी की शिकायतें मिल रही थीं। मास्क और हैंड सैनिटाइजर की अधिक कीमत पर बिक्री को लेकर लोगों से मिली शिकायत के आधार पर ही इनके दाम को कंट्रोल करने की तैयारी की जा रही है। एक कॉमन रेट तय कर उसकी घोषणा कर दी जाएगी ताकि अगर कोई मास्क और सैनिटाइजर की जमाखोरी करता भी है तो उसको कोई लाभ नहीं होगा। प्रशासन शहर के केमिस्ट शॉप के मालिकों के संपर्क में है और उनके साथ बैठकें कर रहा है।
तीन टीमें शहर में कर रही हैं चेकिंग
एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि प्रशासन ने एरिया एसडीएम की अध्यक्षता में तीन टीमों का गठन किया है, जो रोजाना चेकिंग कर रही हैं। किसी भी व्यक्ति, व्यवसायी या संस्था की ओर से जमाखोरी, वितरण या बिक्री में अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मास्क और हैंड सैनिटाइजर की बिक्री में किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर कानून के तहत केस भी दर्ज किया जाएगा। सात साल तक की सजा भी हो सकती है। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए केंद्र सरकार ने मास्क और सैनिटाइजर को आवश्यक वस्तु अधिनियम की श्रेणी में शामिल कर दिया गया है। इस कारण इसकी कालाबाजारी नहीं की जा सकती।