चंडीगढ़। मैरिज हॉल के निर्माण के लिए 67 पेड़ काटने की अनुमति को लेकर दाखिल बिल्डर की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पूछा कि ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है, शादी का हाॅल या पर्यावरण?
खंडपीठ के समक्ष दायर आवेदन में पंजाब के डेवलपर ने 24 दिसंबर 2025 के उस आदेश में संशोधन की मांग की जिसके तहत अदालत ने पंजाब में पेड़ों की कटाई पर बिना न्यायालय की अनुमति रोक लगा दी थी। याची के वकील ने दलील दी कि संबंधित परियोजना के लिए पहले ही 67 पेड़ काटने की प्रशासनिक अनुमति मिल चुकी थी और वनीकरण योजना के तहत लगभग सात लाख रुपये भी जमा कराए जा चुके थे।
यह समस्त प्रक्रिया अदालत के स्थगन आदेश से पूर्व पूरी कर ली गई थी। वकील ने कहा कि मैरिज हाॅल का उद्घाटन 28 फरवरी को प्रस्तावित है और निर्माण के लिए दो करोड़ रुपये से अधिक का बैंक ऋण लिया गया है। स्वीकृति पत्र की शर्तों के अनुसार उसी तारीख से व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करना अनिवार्य है। यदि संचालन प्रारंभ नहीं हुआ तो खाता एनपीए घोषित होने का खतरा है और राजस्व स्रोत बाधित हो जाएगा।
इसी दौरान मुख्य न्यायाधीश ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि आपको तय करना होगा कि ज्यादा जरूरी क्या है? कोर्ट ने संकेत दिया कि वित्तीय दबाव और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यव्यापी रोक का उद्देश्य अंधाधुंध कटाई पर नियंत्रण है और ऐसे मामलों में विशेष अनुमति का औचित्य गंभीरता से परखा जाएगा। याची की ओर से आग्रह किया गया कि 28 फरवरी से पहले मामले को तात्कालिक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए ताकि व्यवसाय समय पर शुरू किया जा सके।