संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। किसानों को अब जल्द ही चूहों की समस्या से निजात मिल सकती है। अब तक चूहों के लिए जिंक फास्फाइड चारा उपयोग किया जाता था जिसका किसान प्रयोग करते थे पर चूहों की नई पीढि़यां इसके लिए प्रतिरोधात्मक क्षमता डवलप कर लेती थीं। लेकिन अब जो फास्फाइड चारा पेटेंट करवाया गया है वह टिकाऊ भी है और घातक असर वाला भी। इस अभिनव फास्फाइड चारे की टेक्नोलाजी के लिए कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के जूलॉजी विभाग को पेटेंट मिल गया है। यह विभाग को मिला पहला पेटेंट है, जो किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा।
वर्तमान समय में देशभर के किसान जिंक फॉस्फाइड चारा उपयोग करते हैं। शुरू में यह प्रभावी होता है। समय के साथ चूहों की नई पीढ़ियां इसमें प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेती हैं। इसका असर घट जाता है। इसका समाधान करते हुए विभाग के वैज्ञानिकों ने स्थिर और तुरंत उपयोग योग्य फॉस्फाइड चारा विकसित किया है। इस तकनीक के आविष्कारकों में विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बीके बब्बर, एमएससी की छात्रा सोनम कक्कड़, पीएयू के पूर्व छात्र व वर्तमान में ओरियन ऑर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड लुधियाना में कार्यरत डॉ. राकेश कुमार हैं। डॉ. बब्बर ने बताया कि यह उपलब्धि सर्वभारतीय नेटवर्क प्रोजेक्ट ऑन रॉडेंट कंट्रोल के अंतर्गत किए गए शोध का परिणाम है। पीएयू के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल, अनुसंधान निदेशक डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट, बेसिक साइंसेज कॉलेज की शोध संयोजक डॉ. नीना सिंगला, विभागाध्यक्ष डॉ. तेजदीप कौर कलेर और टेक्नोलॉजी मार्केटिंग सेल के सहायक निदेशक डॉ. खुशदीप धरणी ने इस सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी।