कोन स्थित कनहर नदी पर बने पुल पर पड़ी दरार से दिखती छड़। अमर उजाला
एनएचआई के परियोजना निदेशक ने वन मंडल अधिकारी को पत्र लिखकर कहा कि वह क्षतिपूर्ति अदा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हिमालयन एक्सप्रेस वे लिमिटेड चंडीमंदिर टोल प्लाज निर्माण के दौरान अवैध कब्जे को लेकर क्षतिपूर्ति के लिए वह 92 लाख 65 हजार 400 रुपये भरने को तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस संबंध में पर्यावरण कोर्ट कुरुक्षेत्र में चल रहे केस को भी खत्म करने का आग्रह किया है। इसका खुलासा आरटीआई के जवाब में हुआ है।
शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल ने 2012 में कंपनी द्वारा वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण की शिकायत केंद्रीय सशक्त कमेटी नई दिल्ली से की थी। शिकायत पर कार्रवाई को लेकर जब विजय बंसल ने आरटीआई डाली तो वन मंडल अधिकारी मोरनी पिंजौर ने जानकारी दी उससे खुलासा हुआ कि चंडीमंदिर क्षेत्र में हिमालयन एक्सप्रेस वे लिमिटेड ने चंडीमंदिर टोल प्लाजा निर्माण के दौरान वन विभाग की 9.2654 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है। वन मंडल अधिकारी मोरनी पिंजौर ने कंपनी द्वारा किए गए कब्जे को लेकर कार्रवाई करते हुए कंपनी पर 92 लाख 65 हजार 400 रुपये की क्षति रिपोर्ट भेजी है।
वन मंडल अधिकारी ने यह कार्रवाई भारतीय वन अधिनियम और वन संरक्षक अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। वन संरक्षक अधिनियम 1980 के अनुसार अवैध कब्जे की जमीन की कीमत या उतनी जमीन खरीद कर काटे गए पेड़ लगाने की कीमत तथा 10 गुणा पेड़ लगाने की कीमत देने का प्रावधान है। विजय बंसल ने बताया कि विगत 2012 में केंद्रीय सशक्त कमेटी नई दिल्ली को हिमालयन एक्सप्रेस वे लिमिटेड द्वारा चंडीमंदिर टोल प्लाजा के निर्माण में वन विभाग भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत की थी। जिस पर केंद्रीय सशक्त कमेटी ने मुख्य सचिव हरियाणा सरकार एवं मुख्य वनपाल हरियाणा सरकार को कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।
बंसल ने बताया कि लाखों रुपये की क्षतिपूर्ति चाक करने के अलावा हरियाणा वन विभाग ने अतिरिक्त मुख्य वनपाल केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने मुख्य वनपाल को करोड़ों रुपये के जुर्माना हेतु सिफारिश भी की हुई है। यह मामला अतिरिक्त मुख्य वनपाल केंद्रीय पर्यावरण के पास विचाराधीन है।