जीओ मेस में खुद को मारी थी गोली
मामला 15 मार्च 2017 का है। हिसार के शेखपुरा गांव में चुनावी रंजिश के चलते हुए ट्रिपल मर्डर मामले में नाम सामने आने, निलंबन और तबादले के बाद डीएसपी भगवान दास मानसिक तनाव में थे। वह 14 मार्च को पंचकूला सेक्टर-26 स्थित पुलिस लाइन के जीओ मेस पहुंचे थे। अगली सुबह उन्होंने मेस स्थित अपने कमरे में अपनी सर्विस रिवॉल्वर से सिर में गोली मार ली। गंभीर हालत में उन्हें सेक्टर-21 स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब 12 दिन तक उपचार चलने के बाद 27 मार्च को उनकी मौत हो गई थी।
सुसाइड नोट में कई लोगों को ठहराया था जिम्मेदार
घटना के बाद पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला था। इसमें भगवान दास ने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ हत्या का झूठा मामला दर्ज कराया गया है। उन्होंने यह भी लिखा था कि गांव में विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम के जरिए उन्हें सामाजिक रूप से बदनाम किया जा रहा है। सुसाइड नोट में बलबीर सिंह, संजय और अमित समेत कई लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया गया था।
कोर्ट ने कहा- प्रत्यक्ष उकसावा साबित होना जरूरी
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील अमित डुडेजा ने दलील दी कि घटना से पहले या वारदात वाले दिन आरोपियों और डीएसपी के बीच कोई सीधी बातचीत, धमकी या मुलाकात नहीं हुई थी। अदालत ने धारा 107 आईपीसी में दिए गए उकसावे के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित करने के लिए आरोपी की मंशा और आत्महत्या के लिए उकसाने वाला कोई प्रत्यक्ष कृत्य स्थापित होना जरूरी है। केवल किसी मुकदमे में नाम आना, गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन होना या सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने से व्यक्ति का मानसिक तनाव में आना, अपने आप में आरोपियों को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने इसी आधार पर सभी 13 आरोपियों को बरी कर दिया।