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पंचकूला कोर्ट का फैसला: पूर्व डीएसपी आत्महत्या मामले में सभी 13 आरोपी बरी, नाै साल पहले खुद को मारी थी गोली

Mon, 10 Aug 2026 07:38 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला

सार

डीएसपी भगवान दास ने 14 मार्च 2017 को पंचकूला सेक्टर-26 की पुलिस लाइन के जीओ मेस मेस स्थित अपने कमरे में अपनी सर्विस रिवॉल्वर से सिर में गोली मार ली थी। 
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Court Room - फोटो : ANI
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विस्तार
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हिसार के पूर्व डीएसपी भगवान दास की आत्महत्या से जुड़े करीब नौ साल पुराने मामले में पंचकूला की अदालत ने सभी 13 आरोपियों को बरी कर दिया है। 

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अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करवाना या उसकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में नहीं आता। मामले में पुलिस ने कुल 15 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। 

सुनवाई के दौरान दो आरोपियों बलबीर सिंह और रामेश्वर की मौत हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई। अदालत ने बाकी 13 आरोपियों मुकेश, रवींद्र, धर्मवीर, संदीप, संजय, अमित, देवेंद्र, मनदीप, राजेश, कुलदीप, एक अन्य संदीप, दूसरे संदीप और दीपक को बरी कर दिया।

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जीओ मेस में खुद को मारी थी गोली
मामला 15 मार्च 2017 का है। हिसार के शेखपुरा गांव में चुनावी रंजिश के चलते हुए ट्रिपल मर्डर मामले में नाम सामने आने, निलंबन और तबादले के बाद डीएसपी भगवान दास मानसिक तनाव में थे। वह 14 मार्च को पंचकूला सेक्टर-26 स्थित पुलिस लाइन के जीओ मेस पहुंचे थे। अगली सुबह उन्होंने मेस स्थित अपने कमरे में अपनी सर्विस रिवॉल्वर से सिर में गोली मार ली। गंभीर हालत में उन्हें सेक्टर-21 स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब 12 दिन तक उपचार चलने के बाद 27 मार्च को उनकी मौत हो गई थी।

सुसाइड नोट में कई लोगों को ठहराया था जिम्मेदार
घटना के बाद पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला था। इसमें भगवान दास ने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ हत्या का झूठा मामला दर्ज कराया गया है। उन्होंने यह भी लिखा था कि गांव में विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम के जरिए उन्हें सामाजिक रूप से बदनाम किया जा रहा है। सुसाइड नोट में बलबीर सिंह, संजय और अमित समेत कई लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया गया था।

कोर्ट ने कहा- प्रत्यक्ष उकसावा साबित होना जरूरी
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील अमित डुडेजा ने दलील दी कि घटना से पहले या वारदात वाले दिन आरोपियों और डीएसपी के बीच कोई सीधी बातचीत, धमकी या मुलाकात नहीं हुई थी। अदालत ने धारा 107 आईपीसी में दिए गए उकसावे के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित करने के लिए आरोपी की मंशा और आत्महत्या के लिए उकसाने वाला कोई प्रत्यक्ष कृत्य स्थापित होना जरूरी है। केवल किसी मुकदमे में नाम आना, गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन होना या सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने से व्यक्ति का मानसिक तनाव में आना, अपने आप में आरोपियों को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने इसी आधार पर सभी 13 आरोपियों को बरी कर दिया।
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