सीबीआई ने जमानत का किया विरोध
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच में पंकज अग्रवाल की कथित भूमिका सामने आई है। एजेंसी के अनुसार, वह मामले के मुख्य आरोपी और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32 चंडीगढ़ के पूर्व अधिकारी रिभव ऋ षि के संपर्क में थे तथा उन्हें कथित रूप से आर्थिक और अन्य अनुचित लाभ प्राप्त हुए। जांच एजेंसी का दावा है कि स्कूल शिक्षा विभाग और बाद में हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एचएसएएमबी) में प्रधान सचिव रहते हुए उन्होंने कथित तौर पर सरकारी प्रक्रियाओं की अनदेखी कर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाते खुलवाने में भूमिका निभाई, जिनसे करीब 60 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी हुई। वहीं पूरे मामले में विभिन्न विभागों के लगभग 645 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच जारी है।
बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि पंकज अग्रवाल का 26 वर्षों का बेदाग सेवा रिकॉर्ड है। उनके खिलाफ किसी प्रकार की धनराशि की बरामदगी या मनी ट्रेल नहीं मिली है और उन्होंने केवल प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी दी थी। दूसरी ओर सीबीआई ने कहा कि जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्य और अन्य सामग्री से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। अदालत ने कहा कि अभियोजन के आरोपों और जांच में एकत्र किए गए साक्ष्यों की सत्यता का अंतिम परीक्षण ट्रायल के दौरान होगा, लेकिन इस स्तर पर उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने पंकज अग्रवाल को 23 जून 2026 को गिरफ्तार किया था और मामले की जांच अभी भी जारी है।