पंचकूला। शहर में ऑनलाइन ठगी बढ़ने के बाद डीसीपी के निर्देश पर अक्तूबर माह में हर थाने में साइबर डेस्क बनाई गई थी। डीसीपी मोहित हांडा के निर्देश हैं कि अगर कोई भी ऑनलाइन ठगी का मामला है, तो उसे थाने में दर्ज किया जाए। ठगी के पैसे वापस लाने के लिए 24 घंटे से पहले जांच कर कार्रवाई शुरू की जाए और लोगों के पैसे दिलवाए जाएं। साइबर डेस्क के माध्यम से थाने में केस दर्ज होने लगे लेकिन अभी तक केस की जांच 24 घंटे के अंदर नहीं शुरू हो रही है। इस कारण पैसे दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर होने के बाद साइबर ठग आसानी से निकाल लेते हैं। लोगों को पैसे वापस नहीं मिल रहे हैं। दो माह में 20 से ज्यादा ठगी के मामले सामने आए हैं। अभी तक इन मामलों में कोई जांच नहीं हो पाई है। साइबर ठगों ने जिस अकाउंट में ज्यादा पैसे थे। उन लोगों को शिकार बनाया है। इस तरह के हालात में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पंचकूला में 11 माह के अंदर 100 से अधिक लोगों से ठगी हो चुकी है।
इन लोगों को नहीं मिला न्याय
सेक्टर-15 निवासी निर्मल कौशल ने बताया कि उनका खाता इंडसइंड बैंक में है। उनके खाते को अपडेट करने के नाम पर साइबर ठगों ने 1.45 लाख रुपये निकाल लिए। निर्मल कौशल ने बताया कि पैसे निकालने के बाद जांच 24 घंटे में शुरू नहीं हुई। इस कारण पैसे वापस नहीं आ पाए। अभी तक पुलिस की तरफ से इस मामले में कोई जांच नहीं की गई है।
कर्नल के खाते से 9.60 लाख रुपये निकाले
28 अक्तूबर को कर्नल प्रेम सिंह के खाते से पासवर्ड अपडेट करने के नाम पर डिटेल लेने के बाद चार ट्रांजेक्शन में 9.60 लाख रुपये निकाल लिए। पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया। केस दर्ज करने के बाद खाते की डिटेल तीन दिन बाद मांगी। डिटेल देरी से लेने और जांच में विलंब के कारण पैसे निकालने वालों ने पैसे निकाल लिए। सेक्टर-7 थाना पुलिस केवल केस दर्ज करने तक ही सीमित रह गई। इस तरह के हालात में समस्या हुई है।
यह बरतें सावधानी
पंचकूला पुलिस के डीसीपी मोहित हांडा ने बताया कि लोगों के अपने पर्सनल बैंक अकाउंट की डिटेल किसी से शेयर नहीं करें। मोबाइल नंबर सोशल नेट वर्किंग साइट पर नहीं भेजेें। इसके अलावा सोशल साइट से हेल्पलाइन नंबर लेने में सावधानी बरतें।
पुलिस की तरफ से मामलों की जांच की जा रही है। जल्द ही सभी मामलों की जांच कर लोगों के पैसे रिकवर कर लेंगे। इसके लिए पुलिस की स्पेशल टीमें भी बनाकर जांच की जाएगी। - मोहित हांडा, डीसीपी