चंडीगढ़। हरियाणा वन विभाग में अफसर लगातार बढ़ते रहे और कर्मचारियों की संख्या कम होती जा रही है। इसका असर यह है कि गैर वन गतिविधियों व अवैध कटान के कारण वन क्षेत्र घटता जा रहा है। यही स्थिति रही तो वन माफिया पेड़ों का कटान बदस्तूर जारी रखेगा।
आरटीआई के अनुसार वन विभाग में कुल 4504 पद मंजूर हैं, जिसमें से 2690 ही भरे हुए हैं। हरियाणा फॉरेस्ट अफसर के 54 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 33 पर अधिकारी कार्यरत हैं। यह सूचना एडवोकेट विजय बंसल ने आरटीआई के तहत ली है। वन विभाग में रेंजर के 126 पद स्वीकृत हैं, जबकि भरे 45 ही हैं। डिप्टी रेंजर के 123 स्वीकृत पदों में से 60 पर ही अफसर काम कर रहे हैं। फॉरेस्टर के 487 स्वीकृत पदों में से 137 के अलावा अन्य खाली हैं। फॉरेस्ट गार्ड के 1493 मंजूर पद हैं, जबकि काम 793 ही कर रहे हैं। उच्च अधिकारियों के पदों में 800 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है तो धरातल पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी आई है।
वन्य प्राणी विभाग में भी कर्मचारियों की कमी है। वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर के 20 पदों में से 5 खाली हैं। वाइल्ड लाइफ गार्ड के 74 पदों में से 23 के अलावा अन्य को नहीं भरा गया। राजस्व विभाग में वन क्षेत्र को देखने वाला कोई तहसीलदार व पटवारी नहीं है, जबकि पटवारी के 15 पटवारी व कानूनगो के 7 पदों में से 1 ही भरा है। पहले सिर्फ 2 ही प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर आफ फॉरेस्ट (पीसीसीएफ) के पद स्वीकृत थे, जो अब बढ़कर 8 हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार 2004 के बाद फॉरेस्ट रेंजर की नई भर्ती नहीं की गई। बंसल ने बताया कि वन नीति के अनुसार जहां अब तक 20 प्रतिशत वन क्षेत्र होना चाहिए था, अब केवल 3.7 प्रतिशत ही है। यह गैर वन क्षेत्र को मिलाकर लगभग साढ़े छह फीसदी है। 8 पीसीसीएफ बनाकर राजस्व पर बोझ डाला गया है। धरातल पर काम करने के लिए रेंजर, गार्ड व अन्य कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई।
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हरियाणा में कुल वन क्षेत्र
प्रदेश के कुल 4.42 मिलियन हेक्टेयर भौगोलिक एरिया में से 3.52 प्रतिशत वन क्षेत्र है। 15.99 प्रतिशत आरक्षित, 74.36 प्रतिशत प्रोटेक्टेड, 1.06 प्रतिशत अनक्लॉजड व 8.59 प्रतिशत नोटिफाइड एरिया है। सुल्तानपुर व कलेसर नेशनल पार्क सहित दस वाइल्ड लाइफ सेंचुरी हैं। हरियाणा में जंगल के बाहर 3.2 प्रतिशत एग्रो फॉरेस्ट को मिलाकर कुल 6.63 प्रतिशत वन क्षेत्र है।
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वन क्षेत्र बढ़ाने को ये उठाने होंगे कदम
विजय बंसल ने सुझाव दिया है कि रेंजर, गार्ड समेत खाली पदों पर भर्तियां की जाएं। कैंपा योजना के अंतर्गत वन क्षेत्र के साथ लगती जमीनों का अधिग्रहण करें। सुप्रीम कोर्ट ने पीएलपीए की धारा 5 के अंतर्गत आने वाली जमीन को वन क्षेत्र माना है, जबकि मालिकाना हक किसानों के नाम है, इसलिए उन जमीनों को अधिग्रहण कर किसानों का हक दिया जाए।