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अब बिना खून बहाए ही होगी कान, नाक और गले की सर्जरी

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पंचकूला। कान, नाक व गले के रोगियों के लिए एक राहतभरी खबर है। जिले के लोगों को कान और गले की बड़ी सर्जरी के लिए चंडीगढ़ पीजीआई और जीएमसीएच के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में बिना खून बहाए ही हाईटेक मशीनों से सर्जरी होगी। यह दोनों मशीनें (माइक्रो-डिबराइडर और कोबलेटर टू) नागरिक अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में स्थापित कर दी गई हैं। यह दोनों मशीनें 25-25 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई हैं। इसका कुछ मरीजों पर सर्जरी का ट्रायल सफल रहा है। अब मरीज इन मशीनों का बेहतर लाभ उठा सकेंगे।
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बता दें कि पूरे प्रदेश में सबसे पहले पंचकूला सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में माइक्रो-डिबराइडर और कोबलेटर टू मशीनें मरीजों की सर्जरी से जुड़े बेहतर सुविधाओं के लिए लगाई गई हैं। डॉक्टरों की मानें तो अभी हरियाणा में इस तरह की सर्जरी की सुविधा सिर्फ मेडिकल कॉलेज और बड़े-बड़े कारपोरेट अस्पतालों में है। ईएनटी विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने बताया कि संभवतया इस तरह की सुविधा पूरे देश में पहली बार किसी जिला अस्पताल में मिलने जा रही है। यह संभव हो पाया है प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की वजह से। डॉक्टर ने बताया कि उनके प्रयासों से ही इस तरह की सुविधा नागरिक अस्पताल में मरीजों को मिलने जा रही है।
कुछ सर्जरियों के नाम, जो इन मशीनों से होंगी
मास्टॉयडेक्टॉमी
नेक पॉलीप सर्जरी
माइक्रो इयर सर्जरी
नेजल सर्जरी
माइक्रो स्वरयंत्र सर्जरी
टर्बिनोप्लास्टी
टॉन्सीलेक्टोमी
मेडिकल छात्रों को भी मिलेगा अनुभव
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में डीएनबी कोर्स शुरू हो चुका है। अब विद्यार्थियों को भी इन मशीनों से सर्जरी करने का अनुभव मिलेगा। विद्यार्थियों को यह अनुभव नौकरी के दौरान काम आएगा।
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वीएनजी लैब भी स्थापित करने की तैयारी
नागरिक अस्पताल में वीएनजी (वीडियो निस्टैगमो ग्राफी ) लैब भी स्थापित करने की तैयारी चल रही है। इस लैब के जरिए जिन मरीजों को बार बार चक्कर आने पर बीमारी का पता नहीं चल पाता था कि चक्कर क्यों आ रहा है। इसकी जांच की सुविधा वीडियो निस्टैगमो ग्राफी के जरिए की जा सकेगी। वर्तमान में यह सुविधा अस्पताल में नहीं होने के चलते केस हिस्ट्री का सही तरीके से डॉक्टर आंकलन नहीं निकाल पाते हैं।
उन्हें मजबूरी में सिटी स्कैन और एमआईआई लिखना पड़ता है। इससे मरीजों का पैसा बर्बाद होता है। इस लैब के सेटअप के लिए स्वास्थ्य विभाग की हाई पर्चेज कमेटी की बैठक होनी है, जिसमें इस लैब के सेटअप से जुड़े मशीनों को खरीदने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। अभी इस सुविधा का लाभ लेने के लिए यहां के मरीजों को पीजीआई और जीएमसीएच का चक्कर लगाना पड़ता है।
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