फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panchkula News: सिविल अस्पताल में अब शाम की शिफ्ट में भी फ्री में होगी डायलिसिस

विज्ञापन
विज्ञापन
पंचकूला। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में एक सप्ताह पहले फ्री डायलिसिस की शुरुआत की गई है। एक हफ्ते में 117 लोगों ने फ्री डायलिसिस शुरू करवाई है, अब तक हरियाणा के करीब 84 मरीज डायलिसिस का लाभ ले चुके हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शाम के शिफ्ट में भी फ्री डायलिसिसि का लाभ लेने वाले मरीजों को शिफ्ट कर दिया गया है। अब चारों शिफ्टों में किडनी के मरीज फ्री डायलिसिस की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम के तहत मरीजों को यहां डायलिसिस की सुविधा पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत दी जाएगी। जिसका खर्च सरकार वहन करती है। अभी आठ बेड का डायलिसिस सेंटर पंचकूला में है। यहां 17 मशीनें हैं। इनमें एक इमरजेंसी के लिए रखा गया है। यह जानकारी सिविल सर्जन मुक्ता कुमार ने दी।
विज्ञापन


क्या है डायलिसिस
किडनी की कार्यक्षमता कमजोर होने पर शरीर से जहरीला पदार्थ पूरी तरह नहीं निकल पाता। क्रिएटिनिन और यूरिया जैसे पदार्थों की अधिकता होने पर कई प्रकार की समस्याएं बढ़ जाती हैं, तो ऐसे में मशीनों की सहायता से रक्त को साफ करने की प्रक्रिया को डायलिसिस कहते हैं।





हीमोडायलिसिस
यह एक प्रक्रिया है। जिसे कई चरणों में संपन्न करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में शरीर से विशेष प्रकार की मशीन द्वारा एक बार में 250 से 300 मिलिलीटर रक्त को बाहर निकालकर शुद्ध किया जाता है और वापस शरीर में डाला जाता है। इस शुद्धीकरण के लिए डायलाइजर नामक चलनी का प्रयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया केवल अस्पताल में ही की जाती है।
विज्ञापन




पेरिटोनियल डायलिसिस
इस डायलिसिस में रोगी की नाभि के नीचे ऑपरेशन के माध्यम से एक नलिका लगाई जाती है। इस नलिका के जरिए एक प्रकार का तरल (पी. डी. लूइड) पेट में प्रवेश कराया जाता है। पेट के अंदर की झिल्ली डायलाइजर का काम करती है जो पीडी लूइड के अच्छे पदार्थों को शरीर में प्रवेश कराती है और रक्त में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालती है। इस तरल को पेट में 5-6 घंटे तक रखना पड़ता है। इसके बाद नलिका के माध्यम से पीडी. लूइड को बाहर निकाला जाता है। यह आजकल प्रचलन में काफी ज्यादा है। यह उपचार उन लोगों का होता है, जो या तो बेहद कम उम्र या ज्यादा आयु के होते हैं, विज्ञान की भाषा में इसे एक्सट्रीम ऑफ एजेस कहते हैं। जिन लोगों को हृदय संबंधी समस्या हो या से लोग जो हीमोडायलिसिस प्रक्रिया को सहन न कर पाए उनके लिए उपचार का यह तरीका काफी उपयोगी होता है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें