चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू 9 मई को मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात करेंगे। उन्होंने यह जानकारी रविवार को अपने ट्विटर हैंडल पर साझा की। सिद्धू ने ट्वीट किया- पंजाब की अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के मामलों पर चर्चा करने के लिए सोमवार शाम 5:15 बजे चंडीगढ़ में सीएम भगवंत मान से मुलाकात करूंगा... पंजाब का पुनरुत्थान एक ईमानदार सामूहिक प्रयास से ही संभव है...।
सिद्धू की मुख्यमंत्री से मुलाकात की जानकारी सामने आते ही प्रदेश कांग्रेस के साथ-साथ अन्य सियासी दलों की नजरें भी इस पर टिक गईं हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश प्रधान राजा वड़िंग द्वारा पार्टी मामलों के प्रभारी हरीश चौधरी को लिखे पत्र की बातें बिल्कुल सही साबित होने लगी हैं कि नवजोत सिद्धू पार्टी के समानांतर गतिविधियां चलाए रखना चाहते हैं। इस बीच, राजा वड़िंग ने मुख्यमंत्री और सिद्धू के बीच किसी आधिकारिक मुलाकात से इनकार किया है।
उल्लेखनीय है कि राजा वड़िंग के पत्र के आधार पर हरीश चौधरी ने कांग्रेस हाईकमान को पत्र भेजकर सिद्धू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की थी। इसे गंभीरता से लेते हुए हाईकमान ने भी इस मामले को अनुशासन समिति के सुपुर्द कर दिया है, जिस पर जल्द फैसला लेने की उम्मीद है।
उधर, पंजाब आम आदमी पार्टी (आप) सिद्धू के इस नए पैंतरे को विभिन्न पहलुओं के आधार पर तोलने लगी है। पार्टी का मानना है कि सिद्धू के लिए आप के दरवाजे तो बंद हो चुके हैं, फिर भी सिद्धू मुख्यमंत्री से मुलाकात के सहारे खुद को पंजाब के हितों की चिंता करने वाले नेताओं में सबसे आगे दिखाई देना चाहते हैं। इसके अलावा, यह भी माना जा रहा है कि सिद्धू उक्त मुलाकात के सहारे कांग्रेस हाईकमान को यह दिखाना चाहते हैं कि वह पंजाब में राजा वड़िंग के मुकाबले ज्यादा सक्रिय हैं। सिद्धू द्वारा इससे पहले सूबे में कांग्रेस सरकार के समय मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा लिए जाने वाले फैसलों में हस्तक्षेप किसी से छिपा नहीं है। हालांकि तब सिद्धू के पास पार्टी प्रधान के रूप में काफी अधिकार थे, लेकिन कांग्रेस में उनकी स्थिति बदल चुकी है। कांग्रेस हाईकमान उन्हें लगातार अनदेखा कर रहा है, वहीं सूबे के कांग्रेसी नेता भी उनसे दूरी बनाते जा रहे हैं।