पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब विश्वविद्यालय को बड़ा झटका देते हुए मुनीष पाल सिंह उर्फ मुनीष वर्मा की स्नातक क्षेत्र से सीनेट सदस्यता रद्द करने के सीनेट के प्रस्ताव को रद्द कर दिया हैै। न्यायाधीश फतेहदीप सिंह ने मुनीश वर्मा द्वारा स्नातक क्षेत्र की सूची से उनका नाम हटाने के सीनेट द्वारा पास किए गए प्रस्ताव के खिलाफ उच्च न्यायालय मं याचिका दाखिल की थी।
न्यायालय ने याचिका का निपटारा कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी प्रस्ताव को निर्धारित संख्या को पूरा किए बगैर कैसे पारित कर दिया गया। उच्च न्यायालय ने कहा कि कोई भी प्रस्ताव पास करने से पहले सीनेट में सदस्यों की संख्या से जुड़ा आंकड़ा पूरा होना चाहिए। सीनेट के तय नियमों के अनुसार सदस्यता रद्द करने के लिए सीनेट के दो-तिहाई सदस्यों द्वारा प्रस्ताव पास किया जाना जरूरी है।
जबकि पीयू सीनेट बैठक में 91 में से सिर्फ 38 सदस्य ही मौजूद थे, साफ है कि प्रस्ताव पास करने के दौरान सीनेट की इस बैठक में दो-तिहाई सदस्य उपस्थित नहीं थे। ऐसे में मुनीश वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव पास किया जाना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। इसलिए मुनीश वर्मा के खिलाफ पास किए गए इस प्रस्ताव को रद्द किया जाता है।