बेड पर पड़े तीन साल के विशेष बच्चे ने पिता की जिंदगी को एकदम बदल डाला। इलेक्ट्रीशियन का काम करने वाले पिता ने काम छोड़कर समाजसेवा की राह पकड़ ली और नतीजा सामने है। कुछ दिनों पहले मोरनी गांव के मटौर में साइकिल तक नहीं जाती थी, अब जीप भी चली जाती है। यह बदलाव ले आए हैं मोरनी खंड की 23 पंचायत के अध्यक्ष और युवा सुनील शर्मा।
मोरनी के गांव मटौर के रहने वाले सुनील शर्मा ने बताया कि तीन वर्ष पहले उनके बेटा हुआ, वह विशेष बच्चा है। उन्होंने जब बेटे की यह दशा देखी तभी से सिर्फ इसलिए समाजसेवा का काम करते हैं कि शायद एक दुआ उनके बेटे को ठीक कर जाए। मटौर गांव में सरपंच चुने गए तो उन्होंने यहां की सड़कों को बनवाना शुरू किया। इसमें उन्होंने ग्रामीणों की मदद ली। ग्रामीणों के काम का नतीजा हुआ कि अब सड़क बन चुकी है।
सरपंच के पिता दिहाड़ीदार हैं और सुनील ने उनको भी सड़क बनवाने के काम पर लगा दिया। सुनील बताते हैं कि यूं तो मजदूरी साढ़े तीन सौ रुपये होती है, लेकिन उनके पिता सिर्फ ढाई सौ रुपये की दिहाड़ी पर इसलिए काम करते हैं कि गांव को सुविधा मिल जाए। मोरनी के पहाड़ी इलाकों में कब्जा हटवाना सुनील के लिए बड़ी समस्या थी। उन्होंने बताया कि मोरनी खंड की 23 पंचायतों को बुलाकर इन कब्जों के बारे में बात की गई तो सभी ने कब्जा हटाने के लिए हामी भर दी। इसका लाभ यह हुआ कि सड़क चौड़ी बन गई। सुनील ने बताया कि इस इलाके में पानी की टंकियां और घरों में नलके लगवाए, इससे लोगों की समस्या काफी हद तक कम हो गईं।
विकास को प्रमुखता
सुनील शर्मा ने कहा कि चुनाव में खर्च करने का क्या लाभ है। चुनाव खर्च को डेवलपमेंट में लगाना ज्यादा बेहतर है। उनसे जब पूछा गया कि आप सरपंच न होते तो भी क्या यह करते तो उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सरपंच बनना नहीं बल्कि डेवलपमेंट करना है।
हर गांव तक पानी पहुंचाने की कोशिश
सुनील शर्मा ने कहा कि उनकी कोशिश मोरनी खंड के हर गांव तक पानी पहुंचाने की है। इसके लिए वह लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहते हैं। पंचकूला की नई डीसी से वह जल्द मिलेंगे और गांव के संबंध में सारी जानकारी देंगे।