पिंजौर। अमरावती एनक्लेव रजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने नगर परिषद कालका के कार्यकारी अधिकारी से अमरावती एनक्लेव में बढ़ते बंदरों और आवारा कुत्तों के आतंक से छुटकारा दिलाने की मांग की है। एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि यहां पर आए दिन बंदर और आवारा कुत्ते लोगों पर हमले कर रहे हैं, जिससे लोग जख्मी हो रहे हैं। इस पर उन्होंने नगर परिषद से इनके आतंक से छुटकारा दिलवाने की मांग की है।
इस संबंधी आरडब्ल्यूए के प्रधान शमशेर शर्मा ने बताया कि अमरावती एनक्लेव में करीब 10,000 की आबादी है। यहां पर बंदरों और आवारा कुत्तों ने आतंक मचाया हुआ है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इनके आतंक से दहशत में हैं। कॉलोनीवासी कालोनी में बिना डर के घूमने या किसी काम कि लिए नहीं जा सकते क्योंकि उन्हें हमेशा डर लगा रहता है कि कोई बंदर या आवारा कुत्ता उन पर हमला कर घायल न कर दे।प्रधान ने बताया कि बंदर और कुत्ते कॉलोनी के करीब 15 से 20 बच्चे और बुजुर्ग को घायल कर चुके हैं। इसके अलावा बंदरों ने पानी की टंकियां, बिजली, टेलीफोन, इंटरनेट की वायर सहित पानी के पाइपों, गाड़ियों के शीशे आदि को भारी नुकसान पहुंचाया है। प्रधान ने बताया कि अमरावती एनक्लेव रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव पंचकूला से आतंकी बंदरों को पकड़ने की अनुमति प्रदान कर दी है। उन्होंने स्वीकृति में लिखा है कि अमरावती एनक्लेव से तकरीबन 30-40 आतंकी बंदरों को रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के खर्चे पर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 1288 के अंतर्गत पककर संबंधित वन्य प्राणी निरीक्षक की देखरेख में कलेशर के जंगल में छोड़ने की अनुमति प्रदान की जाती है। शमशेर शर्मा ने कार्यकारी अधिकारी से आग्रह किया है कि कॉलोनीवासियों के लिए खतरा बने इन बंदरों को पकड़कर अन्य जगह छोड़ा जाए। इसके अलावा आवारा कुत्तों की नसबंदी करवाई जाए, जिससे आवारा कुत्तों की संख्या में और अधिक बढ़ोतरी न हो।