पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि मंगनी होने वाले जीवन साथी को यौन शोषण का अधिकार नहीं देता है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में लड़की की मर्जी के बिना उससे शारीरिक संबंध बनाए गए हैं, ऐसे में याची अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है।
याचिका दाखिल करते हुए करनाल निवासी मंगेतर ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की है। याची ने बताया कि उसकी पीड़िता से जनवरी 2022 में मंगनी हुई थी। इसके बाद जून में वह एक होटल में रुके थे जहां दोनों के बीच संबंध बने।
याची ने बताया कि उसका विवाह दिसंबर में पीड़िता से तय था लेकिन इससे पहले उसे पता चला कि उसकी होने वाली पत्नी के कई पुरुष दोस्तों से प्रेम संबंध हैं। इसके बाद याची ने विवाह के लिए मना कर दिया। याची के मना करने के बाद पीड़िता ने 23 जुलाई को दुष्कर्म का केस याची पर दर्ज करवा दिया।
याची ने कहा कि दोनों की सहमति से संबंध बने हैं, ऐसे में इसे दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता। पीड़ित पक्ष की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि याची ने कई बार पीड़िता से संबंध बनाने का दबाव बनाया लेकिन उसने मना कर दिया था।
जून में आराम के बहाने याची पीड़िता को होटल लेकर गया और मना करने के बावजूद संबंध बनाए और इसका वीडियो भी बनाया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही मंगनी के बाद संबंध बनाए गए हैं लेकिन मंगनी मंगेतर को उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके यौन शोषण का अधिकार नहीं देता।