हरियाणा में मक्का की खेती को बढ़ावा देने की योजना तैयार की गई है। खरीफ सीजन 2022-23 के लिए लगभग 20,000 एकड़ क्षेत्र मक्का की खेती के अधीन लाने का लक्ष्य रखा गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के लुधियाना स्थित भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान इस पर काम कर रहा है।
मक्का अनुसंधान संस्थान की ओर से पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर 500 एकड़ में प्रदर्शन खेती फार्म की योजना तैयार की गई है। अंबाला या करनाल में सितंबर के तीसरे सप्ताह में मक्का दिवस मनाया जाएगा। यह जानकारी हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने दी।
वह मंगलवार को लुधियाना स्थित भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे। इस मौके पर हरियाणा कृषि महानिदेशक डॉ. हरदीप कुमार व अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। गोशालाओं में चारे की आवश्यकता रहती है, इसलिए किसान, गोशाला तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग मिलकर काम करें।
गोशालाओं की जमीन पर चारे के लिए मक्का की खेती की जा सकती है। इसके लिए कम से कम 10 गोशालाओं को चिह्नित किया जाए। परिषद ने पंजाब में मक्का की खेती को बढ़ावा देने के लिए कईं साइलो प्लांट बनाए हैं, जहां से पशु चारा पैक कर दूसरे राज्यों में भेजा जाता है। परिषद हरियाणा में भी साइलो पर काम करने की योजना तैयार कर रहा है जिसका प्रस्तुतीकरण जेपी दलाल के समक्ष किया गया।
हरियाणा में मक्का की खेती वाले जिलों में सोनीपत, पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और करनाल शामिल हैं। हालांकि, सिरसा, भिवानी, पानीपत, रोहतक, करनाल व चरखी दादरी के कुछ क्षेत्रों में भी मक्का की खेती की जाती है।
औसतन उत्पादन 12 से 13 क्विंटल प्रति एकड़ रहता है और 25,000 मीट्रिक टन मक्का के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सोनीपत जिले का मनोली गांव तो बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की खेती के लिए जाना जाता है। वर्ष 2022 -23 के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1962 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
हरियाणा में खरीफ मक्का की बुआई आमतौर पर 15 जून से 20 जुलाई के बीच होती है तथा कटाई का समय 10 सितंबर से 31 अक्टूबर तक रहता है। जेपी दलाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह मक्का नीति का प्रारूप तैयार करें और खरीफ मक्का पर फोकस करें।