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#Ladengecoronase: कोरोना कमांडोज को सैल्यूट...वे ड्यूटी पर डटे हैं, ताकि लोग सुरक्षित रहें

Mon, 30 Mar 2020 12:16 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो वीणा तिवारी, चंडीगढ़
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अस्पताल में तैनात डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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एक तरफ कोरोना के खौफ से लोग सहमे हुए हैं। कोई भी अपने घर के सदस्यों को बाहर नहीं जाने दे रहा। लेकिन इस समय अस्पताल में एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। कोई मां अपने ढाई साल के बच्चे को घर पर छोड़कर आइसोलेशन वार्ड में कोरोना के मरीजों की देखभाल कर रही है तो कोई अपने परिवार से दूर कोरोना को खत्म करने की जंग में स्वास्थ्य विभाग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। ये दोनों उदाहरण सेक्टर 32 स्थित जीएमसीएच के हैं। जहां का नर्सिंग स्टाफ अपनी जान की फिक्र किए बिना दिन रात कोरोना पर काबू पाने के लिए जूझ रहा है।
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जिस बीमारी के नाम से खौफ में हैं लोग, उसके मरीजों का कर रही इलाज
पूरा विश्व कोरोना के खौफ में है। लोग खुद को सुरक्षित रखने में लिए घरों में हैं। बचाव के लिए लॉक आउट और अन्य जुगत किये जा रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर कनिका कोरोना ग्रस्त मरीजों के बीच रहकर उनका इलाज कर रही हैं। उन्हें समय पर दवा देना, उनका जांच का नमूना लेना, मरीजों का पल पल का अपडेट लेना और उसे नोट करना उनकी ड्यूटी है। 26 साल की डॉ कनिका सेक्टर 32 स्थित जीएमसीएच में कार्यरत हैं। वो पिछले एक हफ्ते से कोरोना के मरीजों के लिए बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी कर रही हैं।

माता पिता चिंता में पर गर्व है मुझ पर
परवाणू की कनिका अपने परिवार से दूर चंडीगढ़ में हॉस्टल में रहकर आगे की पढ़ाई कर रही हैं। कनिका ने बताया कि जब कोरोना फैलने की बात सामने आई हो मम्मी पापा डर गए। मुझे घर वापस आने को कहा। लेकिन मेरी ड्यूटी जीएमसीएच के कोरोना वार्ड में लगा दी गई। ये वो घड़ी है जब खुद को बचाते हुए मुझे अपना कर्तव्य पूरा करना है। इसकी जानकारी मिलने पर घरवालों ने नाराजगी तो जताई लेकिन फिर सुरक्षित होकर काम करने को कहा। मां ने बताया कि पापा कहते हैं कि हमें अपनी बेटी पर गर्व है।
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इलाज के साथ अपनापन भी
डॉ कनिका आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज करने के साथ ही उनकी काउंसलिंग भी करती हैं। उनका कहना है कि इस वक्त उन मरीजों के लोए इलाज के साथ ही मानसिक मजबूती भी बहुत जरूरी है, ताकि वे डिप्रेशन में न जाए। कनिका ने बताया कि ड्यूटी के दौरान वे इस बात का पूरा ध्यान रखती हैं कि किसी स्तर पर कोई लापरवाही न होने पाए। वे थोड़ी थोड़ी देर पर साबुन से हाथ धोना, ग्लव्ज बदलना, मास्क का प्रयोग, प्रोटेक्शन किट का प्रयोग और अन्य मानकों का भी पूरी सावधानी से पालन कर रही हैं।

बेटे को किया पति के हवाले, खुद कर रही मरीजों की देखभाल

कोरोना वार्ड में ड्यूटी कर रही कविता यादव आने ढाई साल के बेटे को घर पर छोड़कर आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों की देखभाल कर रही हैं। कविता ने बताया कि ड्यूटी के बाद घर जाने पर भी वो अपने बेटे और पति से दूरी बनाए रहती हैं ताकि उन्हें संक्रमण न हो।

वो इस संकट की घड़ी में अपने कर्तव्य को लेकर कहती हैं कि अगर डॉक्टर और हम भी डरकर घर मे बैठ गए तो मरीजों का इलाज कौन करेगा। कविता ने बताया कि इस समय पति की छुट्टी है, इसलिए घर की पूरी जिम्मेदारी वो ही निभा रहे हैं। पति के सहयोग से ही वो अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से कर पा रही हैं। कविता का कहना है कि कोरोना का खौफ तो है पर इस बात की खुशी भी है कि इस संकट की घड़ी में वो अपना फर्ज अदा कर रही हैं।

आइसोलेशन वार्ड में लगवाई ड्यूटी
जीएमसीएच के आइसोलेशन वार्ड में अस्पताल प्रशासन से कहकर अपनी ड्यूटी लगवाले वाले डबकेश कुमार का कहना है कि इस समय कोरोना को काबू करने से ज्यादा कोई दूसरा काम हो ही नहीं सकता। ऐसे में अस्पताल के नर्सिंग वेलफेयर एसोसिएशन का अध्यक्ष होने के नाते मेरा दायित्व ज्यादा बनता है कि मैं अपने काम से दूसरों को सकारात्मक संदेश दूं। आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी से डरने वाले स्टाफ मुझे ड्यूटी करता देख अपनी सोच बदल देंगे।

डबकेश ने बताया कि इस समय उनका परिवार राजस्थान में हैं। परिजनों को जब पता चला कि वो आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं तो थोड़ा गुस्सा झेलना पड़ा, लेकिन फिर वो भी समझ गए। उन्होंने सुरक्षा मानकों का ओआलं करने की बात कहकर अपनी ड्यूटी करने को कहा। डबकेश का कहना है को इस संकट की घड़ी में उनके लिए उनका नर्सिंग स्टाफ ही परिवार है। वे आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी के दौरान बचाव के सभी मानकों का पालन कर रहे हैं।

बच्चों को समझाता हूं फिर काम पर आता हूं

मोहाली सिविल अस्पताल के मेडिसन एक्सपर्ट डॉ. भूषण अपनी टीम के साथ जांच व संक्रमित लोगों के इलाज में जुटे हुए हैं। डॉ. भूषण इन दिनों 15 घंटों से ज्यादा क्लीनिकल जॉब कर रहे हैं। उन्हें भी 24 घंटे ही काम करना पड़ रहा है। दुनिया भर से डॉक्टर्स के संक्रमित होने व उनकी मौतों की आ रही खबरों से परिवार डरा हुआ है। बच्चों को रोज समझा कर काम पर आना पड़ रहा है। एक हफ्ता पहले जब मोहाली में कोरोना का पहला संक्रमित मामला सामने आया तब से तो ठीक से बैठ कर खाना भी नहीं खा पाए।

डॉ. भूषण का मेडिकल कैरियर 24 साल का है। डॉ. भूषण बताते हैं कि वह अपने कैरियर में स्वाइन फ्लू और डेंगू से निपट चुके हैं, लेकिन कोरोना इनसे अलग है। यह नया है, इसलिए गहनता से जांच जरूरी है। इसमें जरा सी भी लापरवाही की गुं्जाइश नहीं छोड़ी जा सकती। डॉ. भूषण कहते हैं कि हमारी कोशिश है कि सभी को सही समय पर सही इलाज मिले और लोग ठीक होकर अपने घर लौटें। तभी हमारी मेहनत सफल होगी। डॉ. भूषण बताते हैं कि उनकी धर्मपत्नी इस मुश्किल दौर में उन्हें मजबूती दे रही हैं, हालांकि बच्चे डरे हुए हैं।

घर से बाहर न जाने के लिए जिद करते हैं, उन्हें समझाना पड़ता है। कोरोना के खिलाफ इस जंग के बीच डॉ. भूषण को फेक कॉल कभी कभी तंग करती हैं। उनका कहना है कि हेल्पलाइन में नंबर होने के कारण कई बार तो ऐसी कॉल भी आ जाती है, जिसमें लोग कहते हैं कि उनके घर आटा खत्म है। डॉ. भूषण कहते हैं कि ऐसी कॉल तंग तो करती हैं, लेकिन फिर उन लोगों की मजबूरी का ख्याल आ जाता है।
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दूसरों की तकलीफ देख अपना डर भूल जाती हूं

मोहाली में इंटीग्रेटिड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम की हैड डॉ. हरमनदीप कौर का काम कोरोना वायरस के फैलाव को रोकना है। कोरोना के खिलाफ इस जंग में डॉ. हरमनदीप को अपने एक साल के नन्हें बेटे से अलग रहना पड़ रहा है। एक डाक्टर के फर्ज के सामने मां का फर्ज आड़े न आए इसलिए उन्होंने एक साल के बेटे को गांव में अपने पुश्तैनी घर भेज दिया। अब वह अकेली रहकर 24 घंटे कोरोना के खिलाफ जंग में डटी हुई हैं।

मोहाली में क्वारंटीन किए गए 480 लोगों का डेली अपडेट लेना, किसी भी कॉल पर जा कर उस एरिया को चेक करना लोगों की जांच करना, ये काम डॉ. हरमनदीप नियमित रूप से कर रही हैं। डॉ. हरमनदीप कहती है कि डर को अपने भीतर से निकाल फेंका है। सब लोग मिल कर काम कर रहे हैं। ग्राउंड लेवल पर हैल्थ वर्कर आशा वर्कर पूरी मुस्तैदी से लगे हुए हैं। प्रशासन व पुलिस का पूरा सहयोग है। सभी मिल कर काम कर रहे हैं।

 डॉ. हरमनदीप कहती हैं कि तनाव तो बहुत है, तनाव कम करने के लिए कभी कभी रो लेती हूं, लेकिन फिर अपने काम में जुट जाती हूं। लोग घर में राशन न होने दवाई न होने जैसी समस्याओं को लेकर भी फोन कर देते हैं। लोगों की परेशानी को देखते हुए उनकी समस्या के लिए कॉर्डिनेट भी कर रहे हैं।
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