हरियाणा में आने वाले दिनों में पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए भी बड़े पैमाने पर किसान क्रेडिट कार्ड मुहैया कराए जाएंगे। हरियाणा सरकार ने बैंकों के साथ मिलकर इस योजना को सिरे चढ़ाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। बुधवार को यहां 151वीं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई। पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों ने बैंकर्स समिति से मत्स्य व पशुपालन के लिए भी किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने की मांग की। इस पर बैंकर्स समिति के चेयरमैन व पंजाब नेशनल बैंक के कार्यपालक निदेशक राजेश कुमार यदुवंशी ने कहा कि मत्स्य व पुशपालन हर कोई नहीं कर सकता है। विभाग ने अगर कोई स्कीम बनाई है तो उसे बैंकों के साथ साझा करे। इसके साथ ही इंश्योरेंस का भी प्रावधान किया जाए। क्योंकि, बिना बीमा के मत्स्य व पशुपालन करने का जोखिम कोई नहीं उठाना चाहेगा। इस पर वित्त विभाग की सचिव ने बताया कि मत्स्य पालन विभाग की प्रधान की बीमा कंपनियों से बातचीत चल रही है। समिति चेयरमैन ने मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों को कहा कि वे दिल्ली के आसपास खारे पाने वाले जिलों में क्षेत्र चिन्हित कर बताएं किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए बैंकों को निर्देश देंगे।
प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत किसानों को लाखों क्रेडिट कार्ड दिए जाने हैं। इसलिए बैंक 24 फरवरी तक अपना लक्ष्य पूरा करने में जुट जाएं। यदुवंशी ने बताया कि वर्ष 2019-20 के अंतरिम बजट में केंद्र सरकार ने पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा का विस्तार करने की घोषणा की थी। आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार स्थानीय स्तर पर प्रति एकड़, प्रति यूनिट, प्रति पशु, प्रति पक्षी आदि के आधार पर स्थानीय लागत के अनुसार वित्त का पैमाना जिला स्तरीय तकनीकी समिति (डीएलटीसी) तय कर चुकी हैं। उस आधार पर ही किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जाएंगे। उन्होंने उधारकर्ताओं को बैंकों की देय राशि का समय पर पुनर्भुगतान करने के लिए कहा है। यदुवंशी ने राज्य सरकार से भी अनुरोध किया कि लंबित मामलों का शीघ्र निपटान करवा कर बैंकों की मदद करें। सितंबर 2019 तक 753 करोड़ रुपये की राशि के 23,455 रिकवरी मामले लंबित पड़े हैं। इसलिए सरकार वसूली में करवाने के लिए आवश्यक कदम उठाए। ताकि वसूली से प्राप्त धन को फिर से योजनाओं में लगाया जा सके, जिसकी बैंकों को तत्काल जरूरत है।